छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा बच्चों के अधिकारों पर राज्यस्तरीय कार्यशाला का आयोजन

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा बच्चों के अधिकारों से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर एक दिवसीय राज्यस्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े ने किया। इस कार्यशाला को दो तकनीकी सत्रों में विभाजित किया गया था, जिसमें राष्ट्रीय और राज्य स्तर के विशेषज्ञों ने संबंधित विषयों पर मार्गदर्शन दिया।

कार्यशाला के प्रथम सत्र को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) की प्रतिनिधि शाइस्ता शाह ने संबोधित किया, जबकि द्वितीय सत्र रायपुर कमिश्नर संजीव शुक्ला द्वारा लिया गया। इस आयोजन में प्रदेश के सभी जिलों से जिला शिक्षा अधिकारी, जिला बाल कल्याण अधिकारी, बाल गृह अधीक्षक और विशेष किशोर पुलिस इकाई (SJPU) के अधिकारी सम्मिलित हुए। कार्यक्रम का स्वागत उद्बोधन आयोग के सचिव प्रतीक खरे ने दिया।

आयोग की अध्यक्षा डॉ. वर्णिका शर्मा ने अपने संबोधन में बच्चों के संरक्षण हेतु चिंतन के साथ-साथ सार्थक मंथन पर बल दिया। उन्होंने कहा कि बच्चे राष्ट्र की नींव हैं और हमें उनकी संवेदनशीलता को समझते हुए गंभीरता से कार्य करने की आवश्यकता है। अपने 19 जिलों के प्रवास का अनुभव साझा करते हुए उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करने पर जोर दिया। डॉ. शर्मा ने स्पष्ट किया कि बच्चों से अपराध नहीं बल्कि गलतियां होती हैं और बाल गृहों को केवल एक विकल्प न मानकर बच्चों के घर की तरह संचालित किया जाना चाहिए।

महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े ने कार्यशाला के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बच्चों को सही दिशा देना समाज और प्रशासन की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने जोर दिया कि जब तक हम सभी बच्चों को अपने बच्चों के समान स्नेह और संरक्षण नहीं देंगे, तब तक बच्चों का समग्र विकास संभव नहीं है। यह कार्यशाला उनके भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

तकनीकी सत्रों के दौरान शालाओं में बच्चों की सुरक्षा, एनसीपीसीआर के पॉक्सो ट्रैकिंग पोर्टल और किशोर न्याय अधिनियम 2015 की विभिन्न धाराओं पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यशाला में बच्चों के बीच मादक द्रव्यों के बढ़ते प्रयोग और उनके अवैध व्यापार के उन्मूलन हेतु संयुक्त कार्ययोजना पर विचार-विमर्श किया गया। साथ ही, प्रदेश में नशामुक्ति केंद्रों की स्थापना की संभावनाओं और एनसीपीसीआर की गाइडलाइंस पर पुलिस मुख्यालय, मिशन वात्सल्य एवं समाज कल्याण विभाग के प्रतिनिधियों ने अपनी राय साझा की।

रायपुर कमिश्नर संजीव शुक्ला ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों की संवेदनशील भूमिका को रेखांकित किया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ को बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए सामूहिक शपथ ली गई। साथ ही बाल तस्करी के उन्मूलन और किशोर न्याय अधिनियम के अंतर्गत ‘आफ्टर केयर’ (पश्चातवर्ती देखभाल) के प्रयासों पर जिलेवार कार्ययोजना तैयार करने पर सहमति बनी।

इस गरिमामयी अवसर पर मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े, आयोग अध्यक्षा डॉ. वर्णिका शर्मा, शाइस्ता शाह, रायपुर कमिश्नर संजीव शुक्ला, SJPU हेड रश्मीत कौर, एडिशनल कमिश्नर पुलिस रायपुर कांबले और सचिव प्रतीक खरे सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विभिन्न विभागों के समन्वय से बच्चों के अधिकारों का प्रभावी संरक्षण सुनिश्चित करना रहा।

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