बांग्लादेश : रंगपुर में 1971 के स्वतंत्रता सेनानी जोगेश चंद्र रॉय और पत्नी की गला रेतकर हत्या, अल्पसंख्यकों पर हमलों की बढ़ती घटनाओं ने बढ़ाई चिंता
रंगपुर। शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ अत्याचार की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। रंगपुर जिले के तरागंज उपजिले के उत्तर रहीमापुर इलाके में रविवार सुबह 1971 के मुक्ति संग्राम के एक स्वतंत्रता सेनानी जोगेश चंद्र रॉय और उनकी पत्नी शुभर्णा रॉय का गला रेतकर हत्या कर दी गई। पड़ोसियों ने घर का दरवाजा खटखटाने पर कोई जवाब न मिलने पर सीढ़ी चढ़कर अंदर जाकर दोनों के शव बरामद किए।
75 वर्षीय जोगेश चंद्र रॉय एक सेवानिवृत्त प्राथमिक स्कूल हेडमास्टर भी थे, जबकि उनकी 60 वर्षीय पत्नी शुभर्णा रॉय का शव रसोई में और जोगेश का शव डाइनिंग रूम में खून से सना मिला। दंपति के दो बेटे हैं, जो बांग्लादेश पुलिस में विभिन्न इकाइयों में सेवा दे रहे हैं। पुलिस ने शवों को रंगपुर मेडिकल कॉलेज के शवगृह भेज दिया है और डिटेक्टिव ब्रांच के साथ संयुक्त जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में सिर पर वार से हत्या की आशंका जताई गई है।
यह घटना मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के दौरान अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं पर बढ़ते हमलों के बीच हुई है। अगस्त 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान दर्जनों पुलिसकर्मियों की पीट-पीटकर हत्या की गई थी, जिसके बाद शेख हसीना को पद छोड़कर भारत भागना पड़ा। सूत्रों के अनुसार, हिंसा के एक साल बाद भी बांग्लादेश पुलिस फोर्स की कमी से जूझ रही है।
अल्पसंख्यक अधिकार संगठनों का दावा है कि शेख हसीना के हटने के बाद से साम्प्रदायिक हिंसा की हजारों घटनाएं हुई हैं। हालांकि, अंतरिम सरकार प्रमुख यूनुस ने इन्हें ‘प्रोपगैंडा’ करार दिया है। निर्वासित अवामी लीग नेता एवं पूर्व सूचना मंत्री मोहम्मद अली आराफात ने प्रतिक्रिया में कहा कि यह स्वतंत्रता सेनानियों और उनके परिवारों पर बढ़ते खतरों का संकेत है। उन्होंने चेतावनी दी कि यूनुस सरकार में जमात-ए-इस्लामी जैसे इस्लामिक समूहों का समर्थन प्राप्त हमले तेज हो रहे हैं, जहां स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान, हमला और हत्या हो रही है।
