राष्ट्रपति भवन में गूंजी बस्तर की संस्कृति, राष्ट्रपति मुर्मु के सम्मान से गौरवान्वित हुआ छत्तीसगढ़ : ओपी चौधरी

नई दिल्ली/रायपुर। राष्ट्रपति भवन में बस्तर के जनजातीय प्रतिनिधियों का आत्मीय स्वागत और सम्मान पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का क्षण बन गया। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु द्वारा स्वयं जनजातीय प्रतिनिधियों का स्वागत करना और उन्हें भोजन परोसकर सम्मानित करना भारतीय संस्कृति की आत्मीयता, संवेदनशीलता और जनजातीय समाज के प्रति गहरे सम्मान का सशक्त संदेश है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति भवन में पहली बार बस्तर की पारंपरिक जनजातीय संस्कृति, वेशभूषा, लोक परंपराओं और गौरवशाली विरासत का इतना भव्य प्रदर्शन देखने को मिला। यह केवल बस्तर ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ और देश के लिए गौरव का विषय है।

वित्त मंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु द्वारा बस्तर दशहरा और बस्तर पंडुम में शामिल होने की इच्छा व्यक्त करना बस्तर की सांस्कृतिक पहचान के लिए अत्यंत सम्मानजनक है। इससे प्रदेश की समृद्ध जनजातीय परंपराओं को राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नई पहचान मिलेगी।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का राष्ट्रपति भवन पहुंचना अपने आप में ऐतिहासिक उपलब्धि है। इस अवसर पर बस्तर की लगभग 300 वर्ष पुरानी लोकगाथा ‘झिटकू-मिटकी’ पर आधारित विशेष कलाकृति राष्ट्रपति को भेंट की गई, जो छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय मंच पर स्थापित करने की महत्वपूर्ण पहल है।

इस ऐतिहासिक अवसर पर वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के प्रति आभार व्यक्त करते हुए बस्तर पंडुम-2026 के सभी विजेता प्रतिभागियों, मांझी-चालकी, पद्मश्री सम्मानित विभूतियों तथा जनजातीय प्रतिनिधियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं।

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