RSS शताब्दी वर्ष: पीएम मोदी ने की मोहन भागवत के संबोधन की तारीफ, पंच परिवर्तन को बताया सामाजिक बदलाव का अहम माध्यम

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के नागपुर में विजयादशमी उत्सव के दौरान दिए गए संबोधन की सराहना की है। मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने उनके भाषण को प्रेरणादायी बताया। उन्होंने कहा कि संबोधन में राष्ट्रीय प्रगति, सामाजिक एकता, आत्मनिर्भरता और समाज के चरित्र को मजबूत बनाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जोर दिया गया।

प्रधानमंत्री मोदी ने सेवा और राष्ट्र निर्माण के प्रति संघ के स्वयंसेवकों की प्रतिबद्धता का भी उल्लेख किया। साथ ही, उन्होंने ‘पंच परिवर्तन’ की अवधारणा को समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।

पीएम मोदी ने किन मुद्दों पर की मोहन भागवत की तारीफ?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मोहन भागवत के संबोधन में उठाए गए विभिन्न सामाजिक और राष्ट्रीय विषयों की सराहना की। उन्होंने राष्ट्रीय प्रगति के साथ सामाजिक एकता और आत्मनिर्भरता की आवश्यकता पर दिए गए जोर को महत्वपूर्ण बताया।

पीएम मोदी के अनुसार, सेवा और राष्ट्र निर्माण की भावना समाज को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाती है। उन्होंने संघ के स्वयंसेवकों की प्रतिबद्धता का उल्लेख करते हुए सकारात्मक सामाजिक बदलाव के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

क्या है RSS की पंच परिवर्तन अवधारणा?

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ‘पंच परिवर्तन’ अवधारणा समाज और व्यक्तिगत जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए पांच प्रमुख विषयों पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य सामाजिक सद्भाव, पारिवारिक मूल्यों, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी सोच और नागरिक जिम्मेदारियों को प्रोत्साहित करना है।

पंच परिवर्तन के पांच प्रमुख विषय इस प्रकार हैं:

1. सामाजिक समरसता: समाज में भेदभाव कम करना, समानता की भावना बढ़ाना और आपसी सद्भाव को मजबूत करना।

2. कुटुंब प्रबोधन: परिवार में संवाद, अच्छे संस्कार, आपसी सहयोग और जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देना।

3. पर्यावरण संरक्षण: प्रकृति की रक्षा करना, संसाधनों का जिम्मेदारी से उपयोग करना और पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली अपनाना।

4. स्वदेशी और स्वबोध: स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहित करना तथा भारतीय पहचान, संस्कृति और परंपराओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना।

5. नागरिक अनुशासन: नागरिक कर्तव्यों का पालन करना और समाज व देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझना।

संघ की इस अवधारणा का उद्देश्य सामाजिक जीवन, पारिवारिक व्यवहार और नागरिक कर्तव्यों में सकारात्मक बदलाव को प्रोत्साहित करना है।

1925 में हुई थी RSS की स्थापना

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने वर्ष 1925 में नागपुर में विजयादशमी के दिन की थी। वर्ष 2025 में संघ ने अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे किए और इस अवसर पर देशभर में शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम आयोजित किए गए।

20 अक्टूबर 2026 को नागपुर में आयोजित विजयादशमी उत्सव में संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने संबोधन दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके विचारों की सराहना करते हुए सामाजिक एकता, आत्मनिर्भरता, सेवा और राष्ट्र निर्माण के महत्व को रेखांकित किया।

सामाजिक बदलाव और राष्ट्र निर्माण पर जोर

प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिक्रिया में पंच परिवर्तन की अवधारणा को विशेष महत्व दिया गया। सामाजिक समरसता से लेकर पर्यावरण संरक्षण और नागरिक अनुशासन तक, इन पांच विषयों को समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण माना जाता है।

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