पिथौरा की कर्मचारी कॉलोनी बनी चोरों का सॉफ्ट टारगेट, पुलिस की कार्यप्रणाली से नागरिकों में आक्रोश
पिथौरा। ग्राम पंचायत लहरौद स्थित कर्मचारी कॉलोनी इन दिनों चोरों के निशाने पर है। क्षेत्र में लगातार हो रही चोरी की वारदातों और पुलिस की सुस्त जांच के कारण स्थानीय निवासियों में गहरा संतोष और डर का माहौल है। नागरिकों का आरोप है कि पुलिस की रात्रि गश्त और बीट प्रणाली केवल कागजों तक सीमित रह गई है, जिससे अपराधी बेखौफ होकर घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं।
आंकड़ों के अनुसार, अब तक इस कॉलोनी में करीब 10 बड़ी चोरियां हो चुकी हैं, जिनमें लगभग 74 लाख 60 हजार रुपये की संपत्ति पार की जा चुकी है। यदि अनौपचारिक मामलों को भी जोड़ लिया जाए, तो यह आंकड़ा 80 लाख रुपये के पार पहुंच जाता है। चोरी गई संपत्तियों में 35 से 40 लाख रुपये के जेवर और शेष नगदी शामिल है।
कॉलोनी में हुई कुछ बड़ी घटनाएं इस प्रकार हैं:
राकेश नायक के घर से 30 लाख रुपये के स्वर्ण आभूषण, सत्यवती दुबे के घर से 3.50 लाख रुपये नगद व जेवरात और बाल कुमार ठाकुर के निवास से 3 लाख रुपये के सामान की चोरी हुई है। पूर्व में चितरंजन चौधरी की कार से 10 लाख रुपये, महेश साहू के घर से 4 लाख के जेवर और नीरज अग्रवाल के यहां से 5.50 लाख रुपये की चोरी हो चुकी है। पुनीत सिन्हा के घर में तो एक ही साल में दो बार चोरी हुई, जहां चोरों ने लाखों के जेवर और नगदी पर हाथ साफ किया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि विद्याचरण नायक के घर हुई चोरी के दौरान उन्होंने ओडिशा मूल के दो संदिग्धों को पकड़कर पुलिस के हवाले भी किया था, लेकिन इसके बावजूद वारदातों पर अंकुश नहीं लग सका। पुलिस की कार्यप्रणाली से निराश होकर कई पीड़ित अब छोटी चोरियों की शिकायत दर्ज कराने से भी कतरा रहे हैं।
लगातार हो रही इन घटनाओं के बावजूद पुलिस अब तक किसी भी मामले में शत-प्रतिशत बरामदगी नहीं कर सकी है। क्षेत्र के नागरिकों ने सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त करने, कॉलोनी में नियमित गश्त बढ़ाने और सीसीटीवी निगरानी सुनिश्चित करने की मांग की है ताकि आम जनता में सुरक्षा का भाव बना रहे।
