मुंगेली: वीआईपी जिले में आधे पुलिस बल के भरोसे सुरक्षा, अफसरों और जवानों के पद खाली

मुंगेली। छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और प्रशासनिक रूप से संवेदनशील मुंगेली जिले में पुलिस बल की कमी लगातार गंभीर समस्या बनी हुई है। स्वीकृत पदों के मुकाबले जमीनी स्तर पर आधा से भी कम बल उपलब्ध है, जिससे थाना संचालन, अपराध जांच और कानून-व्यवस्था पर असर पड़ रहा है।

जिले में उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) के पांच स्वीकृत पद हैं, लेकिन वर्तमान में केवल दो पदस्थ हैं। इनमें से एक डीएसपी मातृत्व अवकाश पर हैं। ऐसे में व्यवहारिक रूप से सिर्फ एक डीएसपी ही कार्यरत है। इससे प्रशासनिक नियंत्रण और पर्यवेक्षण दोनों प्रभावित हो रहे हैं।

निरीक्षक (टीआई) स्तर पर स्थिति और चिंताजनक है। स्वीकृत पद 12 हैं, जबकि पदस्थ केवल 6 हैं। आधे थानों और इकाइयों में स्थायी निरीक्षक नहीं हैं, जिससे थाना संचालन और अपराध विवेचना बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

उप निरीक्षक के 30 स्वीकृत पदों में से मात्र 15 पदस्थ हैं, यानी 15 पद रिक्त हैं। सहायक उप निरीक्षक के 45 स्वीकृत पदों में से 36 पदस्थ हैं और 9 रिक्त हैं।

आरक्षक स्तर पर भी बड़ा अंतर है। स्वीकृत पद 442 हैं, जबकि पदस्थ 390 हैं। कुल 52 पद रिक्त होने से फील्ड ड्यूटी के लिए बल कम पड़ रहा है।

मुंगेली जिले का राजनीतिक महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यहां के लोरमी विधायक अरुण साव राज्य के मंत्री और उपमुख्यमंत्री हैं। साथ ही केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू भी इसी जिले से हैं। इन कारणों से वीआईपी और वीवीआईपी दौरे लगातार होते रहते हैं। इन दौरों के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल सुरक्षा में तैनात हो जाता है, जिससे थानों और ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिसिंग प्रभावित होती है।

हाल ही में बिलासपुर रेंज के आईजी रामगोपाल गर्ग मुंगेली दौरे पर आए थे। पत्रकारों के सवाल पर उन्होंने रिक्त पदों की पूर्ति और संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाने का आश्वासन दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही स्वीकृत पदों के अनुसार तैनाती नहीं हुई तो आगामी राजनीतिक गतिविधियों, चुनावी माहौल और वीआईपी मूवमेंट के बीच कानून-व्यवस्था बनाए रखना और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।

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