महतारी वंदन योजना बनी महिलाओं की ताकत: कबीला देवांगन के जीवन में लाई आत्मनिर्भरता और सम्मान
सूरजपुर। महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और सम्मान को नई पहचान देने वाली छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना आज हजारों परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव की कहानी लिख रही है। यह योजना सिर्फ आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और परिवार में उनकी भागीदारी को मजबूत करने का माध्यम बन चुकी है।
इसी योजना का लाभ सूरजपुर जिले के ग्राम बैजनाथपुर की निवासी श्रीमती कबीला देवांगन को भी मिल रहा है। वे बताती हैं कि महतारी वंदन योजना के तहत हर महीने मिलने वाली सहायता राशि ने उनके परिवार को आर्थिक संबल प्रदान किया है। अब वे घर की जरूरी वस्तुएं, रसोई का सामान, साग-सब्जियां और दैनिक उपयोग की आवश्यक सामग्री बिना किसी परेशानी के खरीद पा रही हैं।
आर्थिक चिंता हुई कम, बढ़ा आत्मविश्वास
कबीला देवांगन का कहना है कि पहले छोटी-छोटी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए भी आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। कई बार दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब नियमित आर्थिक सहायता मिलने से परिवार के खर्चों का बेहतर प्रबंधन संभव हो सका है।
वे कहती हैं कि यह राशि केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि महिलाओं के आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और स्वाभिमान को मजबूत करने का माध्यम है। अब उन्हें यह गर्व महसूस होता है कि वे भी परिवार की जिम्मेदारियों में सक्रिय योगदान दे रही हैं।
महिलाओं के जीवन में बदलाव की नई कहानी
महतारी वंदन योजना ने कबीला देवांगन जैसी लाखों महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनने का अवसर दिया है। योजना के कारण महिलाएं न केवल अपनी आवश्यकताओं को पूरा कर पा रही हैं, बल्कि परिवार और समाज में उनकी भूमिका भी पहले से अधिक सशक्त हुई है।
सरकार के प्रति जताया आभार
श्रीमती कबीला देवांगन ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाली एक सराहनीय पहल है। इससे महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने और सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर मिल रहा है।
महिलाओं के लिए आशा और आत्मनिर्भरता का प्रतीक
आज महतारी वंदन योजना प्रदेश की लाखों महिलाओं के लिए सम्मान, सुरक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता का पर्याय बन चुकी है। यह योजना महिलाओं को सशक्त बनाकर न केवल परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही है, बल्कि समाज में उनकी भागीदारी और पहचान को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रही है।
