एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट की मांग को लेकर प्रदेशभर में वकीलों का बहिष्कार, छतरपुर में उग्र प्रदर्शन
इंदौर। मध्य प्रदेश राज्य अधिवक्ता परिषद के आह्वान पर शुक्रवार को पूरे प्रदेश में वकील न्यायालयीन कार्य से विरत रहे। शिवपुरी की घटना के बाद अभिभाषक समुदाय ने एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट को तत्काल लागू करने की मांग दोहराई है। परिषद के आह्वान पर सभी जिलों में अधिवक्ताओं ने अदालतों का बहिष्कार किया।
इंदौर में जिला न्यायालय और हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं ने कामकाज नहीं किया। वकीलों का कहना है कि वे पिछले 20 वर्षों से अधिवक्ता संरक्षण कानून लागू करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक केवल आश्वासन मिला है। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनीष यादव ने कहा कि वर्ष 2012 से राज्य सरकार अधिवक्ता संरक्षण कानून लागू करने का भरोसा दे रही है, पर इसे लागू नहीं किया गया। अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
छतरपुर में प्रदर्शन के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई। वकीलों ने चक्काजाम किया और ज्ञापन देने के लिए बैरिकेड तोड़कर कलेक्ट्रेट परिसर में प्रवेश किया। कलेक्ट्रेट भवन का दरवाजा भी तोड़ा गया। कुछ वकीलों ने निर्वस्त्र होकर विरोध जताया। एक घंटे तक कलेक्टर के नहीं पहुंचने पर प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चौराहे पर जाम लगाया और नारेबाजी की।
मामले की पृष्ठभूमि में अधिवक्ता संजय सक्सेना की हत्या है। वह करैरा सिविल कोर्ट जा रहे थे, तभी सागर ताल के पास बदमाशों ने उन पर गोलीबारी कर दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। परिजनों ने हत्या को जमीन विवाद से जुड़ा बताया है और चार लोगों पर साजिश का आरोप लगाया है। पुलिस जांच में सुपारी किलिंग और चुनावी रंजिश का एंगल भी सामने आया है। पुलिस ने शॉर्ट एनकाउंटर के बाद तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक घायल हुआ है। कुल पांच लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
