छत्तीसगढ़ में जमीन की रजिस्ट्री अब वास्तविक दाम पर: वैज्ञानिक सर्वे के बाद नई दरें तय, ग्रामीण क्षेत्रों में 300% तक संशोधन
रायपुर। छत्तीसगढ़ में वर्ष 2025-26 के लिए लागू की गई नई संपत्ति गाइडलाइन दरों से राज्य के रियल एस्टेट बाजार में पारदर्शिता और स्थिरता बढ़ी है। लगभग आठ वर्षों के बाद किए गए इस बड़े संशोधन से जमीन और मकानों की कीमतों को बाजार के वास्तविक स्तर के करीब लाया गया है। इससे आम नागरिकों, किसानों, निवेशकों और डेवलपर्स के बीच भरोसे का माहौल बना है। यह निर्णय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की पहल का परिणाम माना जा रहा है।
वर्षों पुरानी विसंगतियों का हुआ अंत
वर्ष 2018-19 के बाद से राज्य में गाइडलाइन दरों का व्यापक पुनरीक्षण नहीं हुआ था। इसके कारण बाजार मूल्य और रजिस्ट्री मूल्य के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया था। कई स्थानों पर जमीन की खरीद-बिक्री वास्तविक कीमत पर होती थी, लेकिन रजिस्ट्री कम दर पर दर्ज की जाती थी। इससे पारदर्शिता प्रभावित होती थी और अनौपचारिक भुगतान जैसी समस्याएँ बढ़ती थीं। राज्य सरकार ने 20 नवंबर 2025 से नई गाइडलाइन दरें लागू करते हुए समान परिस्थिति समान दर के सिद्धांत को अपनाया है। इसका उद्देश्य एक ही मार्ग, एक ही वार्ड या आमने-सामने स्थित क्षेत्रों में अलग-अलग दरों की विसंगति को समाप्त करना है।
वैज्ञानिक सर्वेक्षण के आधार पर तय हुई दरें
नई गाइडलाइन दरें केवल कागजी समीक्षा के आधार पर तय नहीं की गई हैं। इसके लिए जिलेवार बिक्री के आंकड़ों, राजस्व रिकॉर्ड, बाजार विश्लेषण और जमीनी सर्वेक्षण को आधार बनाया गया है। गाइडलाइन दर निर्धारित करते समय भौगोलिक स्थिति, सड़क संपर्क, आर्थिक गतिविधियों और शहरी विस्तार जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखा गया है। जिन ग्रामीण क्षेत्रों में पुरानी दरें वास्तविक बाजार मूल्य से काफी कम थीं, वहां 100 से 300 प्रतिशत तक संशोधन किया गया है।
