अंबिकापुर में हुल क्रांति दिवस का भव्य आयोजन, बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर जनजातीय गौरव को किया गया नमन
अंबिकापुर। भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर सरगुजा जिले के अंबिकापुर स्थित पीजी कॉलेज ऑडिटोरियम में हुल क्रांति दिवस का भव्य एवं गरिमामय आयोजन किया गया। जिला प्रशासन सरगुजा और आदिम जाति विकास विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। कार्यक्रम में जिले के 14 जनजातीय समाजों के प्रतिनिधियों, समाज प्रमुखों, जनप्रतिनिधियों और लगभग 1,500 लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
महान जननायकों को श्रद्धांजलि देकर हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत भगवान बिरसा मुंडा, शहीद वीर नारायण सिंह, सिद्धू-कान्हू, मांझी राम गोड़, समाज सुधारक राजमोहनी देवी, संत गहिरा गुरु और जगदेव राम उरांव के चित्रों पर दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण के साथ हुई। इसके बाद विभिन्न जनजातीय समाजों के प्रमुखों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों से डॉ. आशा लकड़ा का स्वागत किया।
डॉ. आशा लकड़ा ने जनजातीय अधिकारों और विकास पर दिया जोर
अपने संबोधन में डॉ. आशा लकड़ा ने कहा कि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग अनुसूचित जनजातियों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा तथा उनके सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक विकास के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा के संघर्ष, नेतृत्व और जनजातीय अस्मिता की रक्षा में उनके ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए हुल क्रांति के महानायक सिद्धू-कान्हू के साहस और बलिदान को भी श्रद्धापूर्वक नमन किया।
जनसुनवाई में सुनीं जनजातीय समाज की समस्याएं
कार्यक्रम के दौरान डॉ. आशा लकड़ा ने विभिन्न जनजातीय समाजों के प्रतिनिधियों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं और सुझावों को सुना। उन्होंने संबंधित विषयों पर आवश्यक कार्रवाई और समाधान का आश्वासन भी दिया।
14 जनजातीय समाजों की रही उल्लेखनीय सहभागिता
इस आयोजन में उरांव, कंवर, मांझी, गोंड, खैरवार, पंडो, नागवंशी, मझवार, नगेसिया, कोरवा, बिंझिया, मुंडा, भुईया और पहाड़ी कोरवा समाज के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य जनजातीय समाज के गौरवशाली इतिहास, संस्कृति, संघर्ष और बलिदान से नई पीढ़ी को परिचित कराना तथा उनमें स्वाभिमान, जागरूकता और प्रेरणा का संचार करना रहा।
जनजातीय विरासत को सहेजने की प्रेरणादायक पहल
हुल क्रांति दिवस का यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनजातीय इतिहास, परंपरा और बलिदान को सम्मान देने तथा आने वाली पीढ़ियों तक उनके संघर्ष की प्रेरणा पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।
