कृषक उन्नति योजना से महासमुंद के किसानों को आर्थिक संबल, 7.67 लाख मीट्रिक टन धान की हो चुकी खरीदी
महासमुंद। छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी कृषक उन्नति योजना जिले के किसानों के लिए आर्थिक संबल का मजबूत आधार बनकर उभरी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन की प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और किसान हितैषी तरीके से संचालित किया जा रहा है। महासमुंद जिले में इस योजना का सीधा लाभ हजारों किसानों को मिल रहा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।
जिले में 18 जनवरी 2026 तक 182 धान उपार्जन केंद्रों के माध्यम से कुल 7 लाख 67 हजार 780 मीट्रिक टन धान की खरीदी की जा चुकी है। वहीं अब तक 5 लाख 18 हजार 507.40 मीट्रिक टन धान के डिलीवरी ऑर्डर जारी किए गए हैं, जिनके विरुद्ध 2 लाख 97 हजार 487.26 मीट्रिक टन धान का उठाव हो चुका है। ये आंकड़े जिले में धान खरीदी व्यवस्था की सक्रियता और सुचारू संचालन को दर्शाते हैं।
धान उपार्जन केंद्रों पर टोकन प्रणाली, इलेक्ट्रॉनिक तौल, नमी परीक्षण और पारदर्शी भुगतान व्यवस्था लागू की गई है। माइक्रो एटीएम के माध्यम से तत्काल नकद निकासी की सुविधा मिलने से किसानों को बड़ी राहत मिली है। किसानों का कहना है कि अब धान विक्रय की प्रक्रिया सरल, तेज और सुविधाजनक हो गई है।
बसना विकासखंड के ग्राम कोलिहादेवरी निवासी कृषक उत्तर कुमार प्रधान ने कृषक उन्नति योजना को किसानों की आर्थिक उन्नति का माध्यम बताया। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान शासन में किसान संतुष्ट हैं और कृषि क्षेत्र नई दिशा में आगे बढ़ रहा है।
उत्तर कुमार प्रधान ने बताया कि शासन द्वारा 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी किए जाने से उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अंतर की राशि का भुगतान समय पर होने से किसानों को बड़ी राहत मिली है। उन्होंने बताया कि उन्होंने 11 एकड़ भूमि में धान की खेती की थी, जिससे लगभग 200 क्विंटल धान का उत्पादन हुआ। इस वर्ष प्राप्त होने वाली आय से वे अतिरिक्त कृषि भूमि खरीदने की योजना बना रहे हैं।
उन्होंने बताया कि धूमाभांठा धान उपार्जन केंद्र में पहले टोकन पर 50 क्विंटल और दूसरे टोकन पर 99.60 क्विंटल धान का विक्रय किया गया। केंद्र पर नमी जांच, तौल और भुगतान की सभी प्रक्रियाएं समय पर पूरी हुईं और किसी प्रकार की असुविधा नहीं हुई।
किसानों का कहना है कि 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर पूरे देश में सबसे अधिक है, जो किसानों के लिए एक ऐतिहासिक और स्वागत योग्य कदम है। कृषक उन्नति योजना न केवल किसानों की आय बढ़ा रही है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
