वन भूमि से अतिक्रमण हटाने के दौरान झड़प, वन विभाग ने सख्त कार्रवाई के दिए संकेत

बलरामपुर। जिले के रघुनाथनगर वन परिक्षेत्र अंतर्गत पंडरी गांव में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने के दौरान हुए विवाद ने तूल पकड़ लिया है। वन विभाग की टीम और ग्रामीणों के बीच झड़प, मारपीट और गंभीर आरोपों के बाद अब विभाग के वरिष्ठ अधिकारी सामने आए हैं। वन मंडलाधिकारी आलोक बाजपेयी ने स्पष्ट किया है कि वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ झड़प, मारपीट और अभद्रता करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

जानकारी के अनुसार, रघुनाथनगर वन परिक्षेत्र के पंडरी गांव के केनवारी क्षेत्र में ग्रामीणों द्वारा वन भूमि पर अवैध कब्जा कर दुकानें और अस्थायी ढांचे खड़े कर दिए गए थे। सूचना मिलने पर वन विभाग का अमला शनिवार को अतिक्रमण हटाने के लिए मौके पर पहुंचा। कार्रवाई शुरू होते ही ग्रामीणों ने विरोध किया, जो जल्द ही धक्का-मुक्की और मारपीट में बदल गया। आरोप है कि इस दौरान रेंजर शिवनाथ ठाकुर सहित वन विभाग के कई अधिकारी और कर्मचारी घायल हुए। करीब एक घंटे तक क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी रही।

स्थिति बिगड़ते देख पुलिस को मौके पर बुलाया गया। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद हालात नियंत्रण में आए। फिलहाल क्षेत्र में शांति बनी हुई है और किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।

इस बीच ग्रामीणों ने रेंजर शिवनाथ ठाकुर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उनसे कथित रूप से पैसे लेकर वन भूमि पर कब्जा करवाया गया था और बाद में वही कब्जा हटाने की कार्रवाई की गई। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि भुगतान के अनुसार जमीन पर कब्जा कराया जाता था, जिसके चलते बड़ी संख्या में लोगों ने वन भूमि पर दुकानें लगाईं।

वन मंडलाधिकारी आलोक बाजपेयी ने कहा कि वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे थे। कार्रवाई के दौरान जिन लोगों ने कानून हाथ में लिया और विभागीय अमले के साथ मारपीट व अभद्रता की, उनके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट तैयार की जा रही है और जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

ग्रामीणों के आरोपों के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हुए हैं। अब यह देखना अहम होगा कि रेंजर पर लगाए गए आरोपों की जांच किस स्तर पर होती है और क्या इस मामले में अलग से जांच कराई जाती है। फिलहाल प्रशासन और वन विभाग पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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