Brij Bhushan Singh Case: चार महिला पहलवानों ने बरी किए जाने के फैसले को दी चुनौती, 26 सितंबर को सुनवाई
नई दिल्ली। पूर्व भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह से जुड़े यौन उत्पीड़न मामले में नया कानूनी मोड़ सामने आया है। चार महिला पहलवानों ने राउज एवेन्यू कोर्ट द्वारा बृजभूषण शरण सिंह को बरी किए जाने के फैसले को दिल्ली की सत्र अदालत में चुनौती दी है। याचिका में निचली अदालत के फैसले पर पुनर्विचार की मांग की गई है।
ट्रायल कोर्ट के फैसले पर उठाए सवाल
महिला पहलवानों की ओर से दाखिल याचिका में दावा किया गया है कि ट्रायल कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों का गलत और चुनिंदा तरीके से मूल्यांकन किया। याचिका में यह भी कहा गया है कि फैसले में यौन उत्पीड़न की शिकायत करने वाली महिलाओं के व्यवहार को लेकर कथित तौर पर रूढ़ धारणाओं का इस्तेमाल किया गया।
पहलवानों की दलील है कि शिकायतकर्ताओं के कथित व्यवहार—जैसे घटना की तारीख को पूरी सटीकता से याद न रख पाना, तत्काल विरोध न करना या बाद में पेशेवर संबंध बनाए रखना—को उनके आरोपों के खिलाफ इस्तेमाल किया गया।
26 सितंबर को सुनवाई की संभावना
मामले में दाखिल याचिका पर 26 सितंबर 2026 को विशेष न्यायाधीश दिग विनय सिंह की अदालत में सुनवाई होने की संभावना है। पहलवानों ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए मामले पर दोबारा विचार की मांग की है।
3 अगस्त को बरी हुए थे बृजभूषण शरण सिंह
राउज एवेन्यू कोर्ट ने 3 अगस्त 2026 को बृजभूषण शरण सिंह और WFI के तत्कालीन सहायक सचिव विनोद तोमर को मामले में बरी कर दिया था। यह मामला छह महिला पहलवानों की शिकायतों से जुड़ा था। रिपोर्टों के अनुसार, छह शिकायतकर्ताओं में से दो बाद में अभियोजन के पक्ष में नहीं रहीं और एक अन्य शिकायतकर्ता से जुड़े आरोपों पर आरोप तय नहीं किए गए थे।
ट्रायल कोर्ट के फैसले में शिकायतों में बताए गए घटनास्थल और वर्ष से जुड़े विरोधाभासों तथा अन्य साक्ष्यों पर भी विचार किया गया था।
2023 में शुरू हुआ था विवाद
बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ महिला पहलवानों के आरोपों को लेकर वर्ष 2023 में दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ था। दिल्ली पुलिस ने जून 2023 में आरोपपत्र दाखिल किया था। इसके बाद मई 2024 में अदालत ने सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न और महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने से जुड़े आरोप तय किए थे।
नाबालिग पहलवान से जुड़े POCSO मामले में शिकायत वापस लिए जाने के बाद दिल्ली पुलिस ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया था।
अब चार महिला पहलवानों द्वारा दायर चुनौती के बाद मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया पर 26 सितंबर की संभावित सुनवाई पर नजर रहेगी।
