Bilaspur High Court: “गुमशुदगी के केस में हेबियस कॉर्पस याचिका नहीं”, लापता छात्र रोहित के पिता की याचिका पर कोर्ट की अहम टिप्पणी
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने डॉ सीवी रमन विश्वविद्यालय के लापता छात्र रोहित कुमार के मामले में दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को खारिज कर दिया है। यह याचिका छात्र के पिता अमरेन्द्र कुमार द्वारा दायर की गई थी, जिसमें पुत्र के विश्वविद्यालय प्रशासन की गैरकानूनी हिरासत में होने की आशंका जताई गई थी।
मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस Ramesh Sinha और जस्टिस Ravindra Kumar Agrawal की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि हेबियस कॉर्पस याचिका तभी स्वीकार्य होती है, जब प्रथम दृष्टया गैरकानूनी हिरासत के ठोस साक्ष्य मौजूद हों।
याचिकाकर्ता ने कोर्ट से मामले की जांच सीबीआई या सीआईडी से कराने और कथित लापरवाही के चलते मानसिक पीड़ा के लिए 5 लाख रुपये मुआवजा देने की भी मांग की थी। हालांकि, कोर्ट ने पाया कि मामले में पहले ही गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज है और सक्षम पुलिस अधिकारियों द्वारा जांच जारी है, ऐसे में इन मांगों पर विचार करने का आधार नहीं बनता।
डिवीजन बेंच ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के प्रसिद्ध निर्णय Kanu Sanyal vs District Magistrate Darjeeling 1973 का हवाला देते हुए कहा कि हेबियस कॉर्पस याचिका केवल तभी लागू होती है, जब यह स्पष्ट रूप से सिद्ध हो कि संबंधित व्यक्ति गैरकानूनी हिरासत में है। यदि ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं है और जांच पहले से चल रही है, तो इस प्रकार की याचिका विचार योग्य नहीं होती।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि इस चरण में अपने असाधारण अधिकार क्षेत्र का उपयोग करने की आवश्यकता नहीं है। इसी आधार पर याचिका को खारिज कर दिया गया। साथ ही, याचिकाकर्ता को कानून के तहत उपलब्ध अन्य वैकल्पिक उपाय अपनाने की स्वतंत्रता दी गई है।
