धनवार जांच नाका में नीलगिरी लकड़ी के अवैध परिवहन का बड़ा रैकेट बेनकाब



बलरामपुर। अंतरराज्यीय वनोपज जांच नाका धनवार में नीलगिरी लकड़ी के अवैध परिवहन का एक बड़ा नेटवर्क संचालित होने का खुलासा हुआ है। आरोप है कि नाका प्रभारी जंगल दरोगा मथुरा प्रसाद दुबे और सहयोगी प्रतिदिन लाखों रुपये की वसूली कर फर्जी परिवहन अनुज्ञा तैयार करवाते थे और ट्रकों को सीमा पार कराने में मदद करते थे। छत्तीसगढ़ से उत्तर प्रदेश और बिहार तक नीलगिरी लकड़ी के परिवहन के लिए दस्तावेज बनवाने और अधिकारियों से सुरक्षा दिलाने के नाम पर यह अवैध गतिविधि लंबे समय से जारी थी।

सूत्रों के अनुसार, नाका में सफाईकर्मी के पद पर तैनात सुरेश यादव स्वयं को वन विभाग का सिपाही बताकर लकड़ी कारोबारियों से व्हाट्सऐप कॉल के जरिए संपर्क करता था और फोनपे के माध्यम से भारी राशि लेता था। वह अधिकारियों की मूवमेंट, चेकिंग की स्थिति, रोकथाम की लोकेशन और वाहनों के सुरक्षित निकलने की जानकारी भी उपलब्ध कराता था। भुगतान होने के बाद ही बिना टीपी वाले वाहनों को रात में सीमा पार कराया जाता था।

स्टिंग ऑपरेशन में उजागर हुआ पूरा नेटवर्क
मीडिया के स्टिंग ऑपरेशन में व्हाट्सऐप चैट, कॉल रिकॉर्डिंग, लेनदेन का विवरण, स्क्रीनशॉट और वाहनों की लोकेशन सहित कई साक्ष्य सामने आए हैं। नाका प्रभारी के संरक्षण में चल रहे इस अवैध नेटवर्क में सुरेश यादव की भूमिका केंद्रीय बताई जा रही है। जसपुर से फर्जी ट्रांसपोर्ट परमिट उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी भी उसी पर थी।

वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
सूत्रों का कहना है कि वाड्रफनगर उपवन मंडला अधिकारी प्रेमचंद मिश्रा की भूमिका भी संदिग्ध प्रतीत हो रही है। वन विभाग के कुछ चुनिंदा अधिकारियों के संरक्षण में यह अवैध कारोबार बड़े स्तर पर संचालित होता रहा, जिससे सरकार को प्रतिदिन लाखों रुपये का राजस्व नुकसान हो रहा है।

जांच के निर्देश, कार्रवाई की तैयारी
कालेधन का खुलासा होने के बाद लकड़ी कारोबारी ने पूरे मामले की शिकायत जिला पुलिस अधीक्षक और वन मंडलाधिकारी से की है। शिकायत के आधार पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के निर्देश जारी किए हैं।

इस खुलासे के बाद आसपास के जिलों में जारी अवैध लकड़ी कटाई व परिवहन के मामलों पर भी वन विभाग की कार्यशैली कटघरे में आ गई है। अब जांच के बाद किन अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई होती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

About The Author