CG News: बाबा कार्तिक उरांव ने शिक्षा और संगठन से जनजातीय समाज को दिखाई विकास की राह, CM साय ने किया योगदान का स्मरण

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बाबा कार्तिक उरांव के जीवन, विचारों और जनजातीय समाज के उत्थान के लिए उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने शिक्षा, संगठन और सामाजिक जागरूकता को परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम बनाया। उनका जीवन आज भी जनजातीय समाज के साथ-साथ युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

सीमित अवसरों के बावजूद हासिल की उच्च शिक्षा

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बाबा कार्तिक उरांव ने उस दौर में उच्च शिक्षा प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया, जब जनजातीय समाज के लिए शिक्षा के अवसर बेहद सीमित थे। उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और विदेश में भी उच्च अध्ययन कर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई।

मुख्यमंत्री के अनुसार, उनकी यह उपलब्धि पूरे जनजातीय समाज के लिए गौरव का विषय है। बाबा कार्तिक उरांव ने शिक्षा को केवल व्यक्तिगत उन्नति तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे सामाजिक बदलाव और विकास का सशक्त माध्यम बनाया।

शिक्षा, संगठन और जागरूकता पर दिया जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा कार्तिक उरांव का मानना था कि शिक्षा, संगठन और जागरूकता के माध्यम से ही समाज अपने अधिकारों की रक्षा कर सकता है और विकास की मुख्यधारा में सम्मानजनक स्थान प्राप्त कर सकता है।

उन्होंने जनजातीय समाज को अपनी परंपराओं, संस्कृति और मूल पहचान के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया। साथ ही नई पीढ़ी को आधुनिक शिक्षा हासिल करने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।

संसद में जनजातीय अधिकारों की उठाई आवाज

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि लोकसभा सांसद के रूप में बाबा कार्तिक उरांव ने जनजातीय समाज की समस्याओं और अधिकारों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता से उठाया। उन्होंने जनजातीय समुदाय के संवैधानिक अधिकारों, सामाजिक हितों और सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास किए।

मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि बाबा कार्तिक उरांव ने धर्मांतरण के बाद जनजातीय आरक्षण और अन्य संवैधानिक सुविधाओं के लाभ से जुड़े विषयों को संसद में प्रमुखता से उठाया था।

आज भी प्रासंगिक हैं बाबा कार्तिक उरांव के विचार

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बाबा कार्तिक उरांव जनजातीय समाज की समृद्ध परंपराओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विरासत को उसकी मूल पहचान मानते थे। उनका विचार था कि सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करते हुए समाज को शिक्षा, तकनीक और आधुनिक विकास के अवसरों से जोड़ना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि बाबा कार्तिक उरांव का जीवन दृढ़ इच्छाशक्ति, परिश्रम और शिक्षा के बल पर विपरीत परिस्थितियों में भी सफलता हासिल करने का उदाहरण है। उनके विचार आज भी जनजातीय समाज के सर्वांगीण विकास की दिशा में मार्गदर्शन करते हैं।

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