पुटकापुरी में भूमि विवाद के दौरान हमला, चार आरोपी गिरफ्तार

रायगढ़। पुसौर थाना क्षेत्र के पुटकापुरी गांव में लंबे समय से चल रहे भूमि विवाद ने 26 नवंबर को हिंसक रूप ले लिया। दो पड़ोसी पक्षों के बीच हुए विवाद में लाठी-डंडों और हथियारों से हमला किया गया। घटना के बाद पुसौर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें रिमांड पर भेज दिया गया। मामला एक आबादी भूमि के स्वामित्व और निर्माण कार्य को लेकर उपजे विवाद से जुड़ा है।

पुटकापुरी निवासी घुरवाराम महंत (50 वर्ष) ने 30 नवंबर को पुसौर थाना में मामले की FIR दर्ज कराई। अपनी रिपोर्ट में घुरवाराम ने बताया कि उसने कीर्तन दास के हिस्से की आबादी भूमि खरीदी थी, जिस पर उसने मकान बनाया था। मकान पुराना होने पर वह दोबारा निर्माण कार्य शुरू करने के लिए पुराने ढांचे को हटाकर नींव डाल रहा था। इस भूमि को लेकर पहले भी विवाद सामने आया था। कीर्तन दास के पुत्र पुरुषोत्तम दास और नाती सेत कुमार ने जमीन को अपना बताते हुए एसडीएम न्यायालय, रायगढ़ से निर्माण कार्य पर रोक का आदेश प्राप्त किया था। स्टे समाप्त होने के बाद घुरवाराम ने 24 नवंबर को पुनः निर्माण कार्य शुरू किया।

घटना 26 नवंबर की दोपहर की है, जब चार आरोपी—पुरुषोत्तम महंत, सेतकुमार महंत, प्रेमा महंत और सुकबाई महंत—स्थान पर पहुंचे और जमीन को अपना बताते हुए निर्माणाधीन दीवार और कॉलम को गैती और सब्बल से तोड़ने लगे। विरोध करने पर आरोपियों ने घुरवाराम और उसके परिवार के सदस्यों पर लाठी-डंडों से हमला किया, जिसमें उन्हें चोटें आईं।

पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अपराध क्रमांक 321/2025 पंजीबद्ध कर धारा 296, 351(2), 115(2), 324(4), 333 एवं 3(5) बीएनएस के तहत कार्रवाई की। जांच के बाद चारों आरोपी—पुरुषोत्तम महंत (59 वर्ष), सेतकुमार महंत (41 वर्ष), प्रेमा महंत (40 वर्ष) और सुकबाई महंत (50 वर्ष) निवासी पुटकापुरी—को गिरफ्तार किया गया। उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहां से रिमांड पर भेज दिया गया।

पुसौर पुलिस ने बताया कि विवाद पुराना है और दोनों पक्षों के दावों की जांच दस्तावेजों, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और भूमि अभिलेखों के आधार पर की जा रही है। पुलिस ने कहा कि मामले को संवेदनशीलता से लेते हुए सभी पहलुओं की गहराई से जांच जारी है। ग्रामीणों से अपील की गई है कि किसी भी भूमि विवाद को स्वयं सुलझाने की कोशिश न करें, बल्कि कानून और न्यायालय की प्रक्रिया का पालन करें, ताकि किसी भी तरह की हिंसक घटना को रोका जा सके।

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