Asian Games 2026: ट्रैक पर दौड़ने का सपना टूटा, पिस्टल थामी तो रचा इतिहास; कमलजीत-सुरुचि ने जीता गोल्ड
नई दिल्ली। हरियाणा के रेवाड़ी के सुल्खा गांव के कमलजीत सिंह का सपना एथलीट बनकर भारत के लिए दौड़ने का था। वह स्प्रिंटर बनने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन महज 15 साल की उम्र में लगी गंभीर चोट ने उनका एथलेटिक्स करियर खत्म कर दिया। हालांकि कमलजीत ने हार नहीं मानी और खेल से अपना रिश्ता बनाए रखते हुए शूटिंग को नया रास्ता बनाया।
साल 2019 में पिस्टल शूटिंग शुरू करने वाले कमलजीत ने आर्थिक चुनौतियों के बावजूद अपनी मेहनत जारी रखी। परिवार ने अपनी बचत लगाकर उनका साथ दिया और गांव के शूटिंग कोच ने भी उन्हें शुरुआती प्रशिक्षण दिया।
जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में जीता गोल्ड

कमलजीत ने शुरुआत में 50 मीटर पिस्टल में अपनी पहचान बनाई और बाद में 10 मीटर एयर पिस्टल में भी बेहतर प्रदर्शन किया। साल 2023 में उन्होंने ISSF जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता।
इस प्रदर्शन के बाद उन्होंने सीनियर स्तर पर कदम रखा और भारतीय टीम में अपनी जगह बनाई।
आखिरी वक्त में मिला मौका, एशियन गेम्स में बना दिया रिकॉर्ड
एशियन गेम्स 2026 में कमलजीत व्यक्तिगत स्पर्धा के फाइनल में जगह नहीं बना सके। मिक्स्ड टीम इवेंट में भी वह शुरुआत में मूल टीम का हिस्सा नहीं थे।
लेकिन आखिरी समय पर केदारलिंग उचागनवे की जगह कमलजीत को टीम में शामिल किया गया। इसके बाद उन्होंने सुरुचि सिंह के साथ 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड टीम फाइनल में शानदार प्रदर्शन किया।
दोनों ने 484.6 अंक हासिल करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया और नया एशियाई रिकॉर्ड भी बनाया। दक्षिण कोरिया ने सिल्वर और ईरान ने ब्रॉन्ज मेडल जीता।
झज्जर की सुरुचि ने भी रचा इतिहास
कमलजीत की जोड़ीदार सुरुचि सिंह हरियाणा के झज्जर की रहने वाली 10 मीटर एयर पिस्टल शूटर हैं। उन्होंने महज 13 साल की उम्र में शूटिंग शुरू की थी।
साल 2025 में सुरुचि ने ब्यूनस आयर्स, लीमा और म्यूनिख वर्ल्ड कप में लगातार तीन व्यक्तिगत गोल्ड मेडल जीते। इसके अलावा दोहा वर्ल्ड कप फाइनल में उन्होंने 245.1 अंक हासिल कर जूनियर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था।
चोट ने बदली राह, लेकिन मंजिल बनी गोल्ड
कमलजीत का ट्रैक पर दौड़ने का सपना चोट के कारण भले ही अधूरा रह गया, लेकिन उन्होंने खेल को अलविदा नहीं कहा। पिस्टल उठाने के करीब सात साल बाद उन्होंने एशियन गेम्स में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतकर अपने संघर्ष को ऐतिहासिक उपलब्धि में बदल दिया।
यह कहानी बताती है कि मंजिल तक पहुंचने का रास्ता बदल सकता है, लेकिन मेहनत और जुनून कायम रहे तो सपने एक नए रूप में भी पूरे किए जा सकते हैं।
