छत्तीसगढ़ कस्टम मिलिंग घोटाले में अनवर ढेबर और अनिल टुटेजा को हाईकोर्ट से जमानत, शराब घोटाले में भी दो आरोपियों को राहत
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ कस्टम मिलिंग घोटाले में हाईकोर्ट ने अनवर ढेबर और रिटायर्ड आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा को जमानत दे दी है। साथ ही शराब घोटाला मामले में आरोपी मुकेश मनचंदा और अतुल सिंह को भी जमानत मिल गई है। बचाव पक्ष के वकील हर्षवर्धन परघनिया ने बताया कि कस्टम मिलिंग घोटाले में ईओडब्ल्यू द्वारा दर्ज मामले में दोनों को आज जमानत मिली है।
कस्टम मिलिंग घोटाले का मामला
यह घोटाला 140 करोड़ रुपये से अधिक का बताया जा रहा है। आरोप है कि राइस मिलर्स से अवैध वसूली की गई, जिसमें अफसरों से लेकर मिलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारी शामिल थे। नागरिक आपूर्ति निगम और एफसीआई में कस्टम मिलिंग के लिए चावल जमा करने की प्रक्रिया में अनियमितताएं की गईं। अनवर ढेबर और अनिल टुटेजा को आरोपी बनाया गया था। ईओडब्ल्यू ने दोनों के खिलाफ मामला दर्ज कर कोर्ट में चालान पेश किया था, जिसके बाद उन्हें जेल भेजा गया था। अब हाईकोर्ट से दोनों को जमानत मिल गई है।
20 रुपये प्रति क्विंटल की दर से अवैध वसूली
ईओडब्ल्यू ने बताया था कि फरवरी 2025 में रोशन चंद्राकर और मनोज सोनी के खिलाफ पहला चालान प्रस्तुत किया गया था। अनिल टुटेजा द्वारा छत्तीसगढ़ प्रदेश राइस मिलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों के साथ आपराधिक षड्यंत्र रचा गया। राइस मिलों से अवैध वसूली के लिए मार्कफेड के जिला विपणन अधिकारियों पर दबाव बनाकर बिल लंबित रखे जाते थे। इससे मिलर दबाव में आकर 20 रुपये प्रति क्विंटल की दर से अवैध राशि देते थे। इस तरह कम से कम 20 करोड़ रुपये की अवैध वसूली की गई।
अनवर ढेबर की भूमिका
अनवर ढेबर 2022 से 2023 तक राजनीतिक रूप से प्रभावशाली व्यक्ति थे। आयकर विभाग के छापे में प्राप्त डिजिटल साक्ष्यों से पता चला कि वे न केवल शराब घोटाले बल्कि तत्कालीन सरकार के समय पीडब्ल्यूडी और वन विभाग में भी प्रभाव रखते थे। कस्टम मिलिंग घोटाले में अनिल टुटेजा के लिए की गई अवैध वसूली का संग्रहण, व्यय, निवेश और उपभोग अनवर ढेबर द्वारा किया गया।
दोनों मामलों में जमानत मिलने के बाद जांच जारी है।
