नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ में विकास की नई रफ्तार, बस्तर को देश का सबसे विकसित आदिवासी अंचल बनाने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा—सुरक्षा कैंप अब बन रहे ‘सेवा डेरा’, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ रहा बस्तर

रायपुर, 5 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ अब नक्सलवाद की चुनौती से आगे बढ़कर विकास, सुशासन, निवेश और नवाचार के नए दौर में प्रवेश कर चुका है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि बस्तर में शांति स्थापित होने के साथ अब विकास और समृद्धि का नया अध्याय लिखा जा रहा है। सरकार का लक्ष्य बस्तर को देश के सबसे विकसित आदिवासी अंचलों में स्थापित करना है।

मुख्यमंत्री साय राजधानी रायपुर में समाचार चैनल लाइव टाइम्स द्वारा आयोजित ‘नक्सलमुक्त विकासयुक्त छत्तीसगढ़@2047’ कार्यक्रम ‘एलटी एक्सचेंज’ में विभिन्न विषयों पर चर्चा कर रहे थे। उन्होंने नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक अभियान, बस्तर का विकास, किसान कल्याण, महिला सशक्तीकरण, आवास, औद्योगिक निवेश, सुशासन, डिजिटल गवर्नेंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे विषयों पर सरकार की प्राथमिकताओं को सामने रखा।

नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता

मुख्यमंत्री ने कहा कि कभी छत्तीसगढ़ की पहचान नक्सलवाद की समस्या से जुड़ी हुई थी, लेकिन आज तस्वीर तेजी से बदल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में केंद्र एवं राज्य सरकार के बेहतर समन्वय से नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक अभियान चलाया गया।

उन्होंने कहा कि इस सफलता के पीछे सुरक्षा बलों के जवानों का साहस, समर्पण और बलिदान सबसे महत्वपूर्ण है। छत्तीसगढ़ उनके योगदान को हमेशा याद रखेगा।

विकास को बनाया नक्सलवाद के खिलाफ रणनीति का हिस्सा

मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल सुरक्षा अभियान से नक्सलवाद की समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं था। इसलिए सरकार ने विकास और जनविश्वास को भी रणनीति का अभिन्न हिस्सा बनाया।

‘नियद नेल्लानार’ योजना के माध्यम से सुरक्षा कैंपों के आसपास के गांवों में सड़क, राशन, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य सरकारी सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। जिन इलाकों में पहले ग्रामीणों को राशन लेने के लिए कई दिन का सफर करना पड़ता था, वहां अब शासन स्वयं लोगों के द्वार तक पहुंच रहा है।

सुरक्षा कैंप बने ‘सेवा डेरा’

बस्तर में सुरक्षा कैंप अब केवल सुरक्षा व्यवस्था के केंद्र नहीं, बल्कि ‘सेवा डेरा’ के रूप में विकसित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से स्थानीय युवाओं को कौशल प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने की योजना है।

पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए होमस्टे विकसित किए जा रहे हैं तथा इसके लिए ऋण और सब्सिडी की व्यवस्था की जा रही है। कृषि, पशुपालन, वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था और पर्यटन को बस्तर के आर्थिक विकास का प्रमुख आधार बनाया जा रहा है।

ओरछा-जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी, गीदम में मेडिकल कॉलेज

मुख्यमंत्री ने बताया कि दंतेवाड़ा के एजुकेशन हब की तर्ज पर ओरछा और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी विकसित करने का प्रावधान बजट में किया गया है। वहीं गीदम में मेडिकल कॉलेज को स्वीकृति दी गई है।

आदिवासी बच्चों को उनकी मातृभाषा में शिक्षा से जोड़ने के लिए प्राथमिक स्तर पर गोंडी और हल्बी जैसी स्थानीय भाषाओं में पढ़ाई की व्यवस्था की जा रही है।

बस्तर के विकास के लिए ‘नियद नेल्लानार 2.0’ का रोडमैप भी तैयार किया गया है। इंद्रावती नदी पर देऊरगांव और मटनार परियोजनाओं के माध्यम से लगभग 80 हजार एकड़ क्षेत्र को सिंचाई सुविधा से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है।

प्रतिदिन बन रहे करीब 1600 प्रधानमंत्री आवास

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार बनने के बाद पहली कैबिनेट बैठक में 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों को स्वीकृति दी गई। पिछले दो वर्षों में 11 लाख से अधिक आवासों का निर्माण पूरा हो चुका है और प्रदेश में प्रतिदिन लगभग 1600 आवास बनाए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि गरीब परिवार के लिए पक्का मकान केवल छत नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और बेहतर भविष्य का आधार है।

महतारी वंदन से महिलाओं को आर्थिक संबल

महिला सशक्तीकरण का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी जा रही है। अब तक 31 किश्तों की राशि प्रदान की जा चुकी है।

उन्होंने कहा कि अनेक महिलाएं इस राशि का उपयोग किराना दुकान, सिलाई मशीन और अन्य आजीविका गतिविधियों में कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं के जीवन में बदलाव देखकर उन्हें आत्मिक संतोष मिलता है।

किसानों की समृद्धि सरकार की प्राथमिकता

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ कृषि प्रधान राज्य है और लगभग 75 प्रतिशत किसान छोटे एवं सीमांत श्रेणी के हैं। सरकार किसानों से 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीद रही है।

किसानों की आय बढ़ाने के साथ सिंचाई, आधुनिक कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर भी लगातार काम किया जा रहा है।

सवा आठ लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नई औद्योगिक नीति और निवेश अनुकूल वातावरण के कारण छत्तीसगढ़ को लगभग सवा आठ लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।

प्रदेश में सेमीकंडक्टर प्लांट, डेटा सेंटर और अन्य भविष्य की तकनीकों से जुड़े प्रोजेक्ट आकार ले रहे हैं। नवा रायपुर में लगभग 100 एकड़ क्षेत्र में मेडिसिटी विकसित की जा रही है।

सरकार का उद्देश्य केवल निवेश आकर्षित करना नहीं, बल्कि इसके माध्यम से रोजगार, आधुनिक तकनीक और आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर पैदा करना है।

डिजिटल गवर्नेंस और AI से बदलेगा प्रशासन

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है, जहां ‘सुशासन एवं अभिसरण विभाग’ बनाया गया है। ई-फाइल प्रणाली लागू होने से सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ी है।

भविष्य की जरूरतों को देखते हुए प्रदेश में AI मिशन पर भी काम किया जा रहा है। करीब 6 लाख विद्यार्थियों और डेढ़ लाख कर्मचारियों को AI का प्रशिक्षण देने की तैयारी है। सरकारी विभागों की कार्यक्षमता और नागरिक सेवाओं को बेहतर बनाने में भी AI के उपयोग की संभावनाओं पर काम हो रहा है।

विकसित भारत@2047 में छत्तीसगढ़ की बड़ी भूमिका

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नक्सलवाद से मुक्ति, बस्तर में शांति और विकास, गरीब कल्याण, महिला सशक्तीकरण, किसान हित, औद्योगिक निवेश, तकनीक और पारदर्शी प्रशासन—इन सभी क्षेत्रों में छत्तीसगढ़ एक साथ आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल वर्तमान समस्याओं का समाधान करना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए समृद्ध, सुरक्षित, आत्मनिर्भर और अवसरों से भरपूर छत्तीसगढ़ का निर्माण करना है। विकसित भारत@2047 के संकल्प में छत्तीसगढ़ अपनी पूरी क्षमता के साथ योगदान देगा और देश के अग्रणी राज्यों में अपनी सशक्त पहचान बनाएगा।

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