शिक्षक दिवस 2026: CM साय ने गुरुजनों को लिखा भावुक पत्र, कहा- किसी बच्चे के सपनों की सीमा तय न करें परिस्थितियाँ
अपने विद्यार्थी जीवन के संघर्षों को किया याद, कहा- पीछे छूट रहे बच्चों का हाथ थामना शिक्षक का सबसे बड़ा दायित्व




शिक्षक दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश के सभी गुरुजनों के नाम एक आत्मीय पत्र लिखकर उन्हें सादर नमन किया। अपने पत्र में मुख्यमंत्री ने अपने विद्यार्थी जीवन के संघर्षों, शिक्षा हासिल करने की कठिनाइयों और शिक्षकों से मिले संस्कारों को याद किया।
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से विशेष आग्रह किया कि वे कक्षा में मौजूद प्रत्येक बच्चे की प्रतिभा को पहचानें और खासतौर पर अभाव, संकोच या किसी अन्य कारण से पीछे छूट रहे बच्चे का हाथ जरूर थामें। उन्होंने कहा कि शिक्षक का थोड़ा-सा विश्वास भी किसी बच्चे के पूरे जीवन की दिशा बदल सकता है।
CM साय का संदेश
“हम ऐसा छत्तीसगढ़ बनाना चाहते हैं, जहाँ किसी बच्चे की परिस्थितियाँ उसके सपनों की सीमा तय न करें।”
बगिया के छोटे से स्कूल से शुरू हुआ शिक्षा का सफर
मुख्यमंत्री साय ने अपने बचपन की स्मृतियां साझा करते हुए बताया कि उनका जन्म जशपुर जिले के बगिया गांव के एक साधारण किसान परिवार में हुआ और गांव के स्कूल से ही उनकी शिक्षा की शुरुआत हुई।
जब वे लगभग 10 वर्ष के थे और चौथी कक्षा में पढ़ रहे थे, तभी उनके पिता का निधन हो गया। कम उम्र में ही परिवार, खेती और छोटे भाइयों की जिम्मेदारियां उनके जीवन का हिस्सा बन गईं।
गांव में पांचवीं तक पढ़ाई के बाद आगे की शिक्षा के लिए उन्हें कुनकुरी के लोयोला उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जाना पड़ा। वहां छोटे से कमरे में रहकर पढ़ाई की। आगे पढ़ने की इच्छा थी, लेकिन पारिवारिक परिस्थितियों के कारण उन्हें अपनी शिक्षा का क्रम रोककर खेती और परिवार की जिम्मेदारी संभालनी पड़ी।
उस दौर की कठिनाइयों को किया याद
मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय गांव के किसी बच्चे के लिए शिक्षा तक पहुंचना आज जितना आसान नहीं था। स्कूल दूर होते थे, आवागमन के साधन सीमित थे और पढ़ाई के संसाधनों का भी अभाव था।
आर्थिक कठिनाइयां भी कई बच्चों के सपनों के सामने बड़ी बाधा बन जाती थीं।
स्लेट-तख्ती से स्मार्ट क्लास तक पहुंची शिक्षा
मुख्यमंत्री ने वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में आए बदलाव को रेखांकित करते हुए कहा कि उनकी पीढ़ी ने स्लेट, तख्ती और चॉक से पढ़ाई शुरू की थी, जबकि आज छत्तीसगढ़ के बच्चे स्मार्ट क्लास और डिजिटल माध्यमों से दुनिया भर के ज्ञान से जुड़ रहे हैं।
स्लेट-तख्ती से स्मार्ट क्लास तक…
शिक्षा के साधन बदले, तकनीक बदली और सीखने के अवसर बढ़े, लेकिन शिक्षक की भूमिका आज भी सबसे महत्वपूर्ण बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों में भी बेहतर विद्यालय, आधुनिक शैक्षणिक संसाधन और नए अवसर बच्चों तक पहुंच रहे हैं।
तकनीक जानकारी दे सकती है, शिक्षक आत्मविश्वास जगाता है
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि तकनीक बच्चों को जानकारी दे सकती है, किताबें ज्ञान दे सकती हैं और आधुनिक संसाधन सीखने की प्रक्रिया को आसान बना सकते हैं।
लेकिन किसी बच्चे के भीतर आत्मविश्वास जगाना, उसकी प्रतिभा पहचानना, संस्कार देना और उसे बेहतर इंसान बनाना एक संवेदनशील शिक्षक ही कर सकता है।
उन्होंने अपने जीवन में गुरुजनों से मिली सीख को याद करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में आगे बढ़ने का साहस उन्हें शिक्षकों से मिले संस्कारों से मिला।
शिक्षक सिर्फ पाठ नहीं पढ़ाता, जीवन की दिशा भी दिखाता है।
शिक्षा में बदलाव, हर बच्चे को समान अवसर देने का संकल्प
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि जिन अभावों और कठिनाइयों के कारण कभी बच्चों की पढ़ाई रुक जाती थी, वे आज उनके सपनों के रास्ते में बाधा न बनें।
उन्होंने कहा कि किसी बच्चे का भविष्य केवल इसलिए सीमित नहीं होना चाहिए कि उसका जन्म किसी छोटे गांव, वनांचल या दूरस्थ क्षेत्र में हुआ है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप छत्तीसगढ़ में शिक्षा को अधिक:
- सहज
- आधुनिक
- व्यावहारिक
- बच्चों की प्रतिभा के अनुकूल
बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
मातृभाषा और स्थानीय भाषाओं में सीखने के अवसर बढ़ाने के साथ-साथ कौशल, व्यावहारिक ज्ञान, डिजिटल शिक्षा और स्मार्ट क्लास का भी विस्तार किया जा रहा है।
बस्तर में फिर सुनाई दे रही स्कूलों की घंटी
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से बस्तर का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे क्षेत्रों में भी विद्यालयों की घंटियां फिर सुनाई दे रही हैं, जहां परिस्थितियों के कारण वर्षों तक स्कूल बंद रहे थे।
उन्होंने कहा कि यह बदलाव केवल स्कूल भवनों, तकनीक और सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके केंद्र में हर बच्चे को आगे बढ़ने का समान अवसर देने का संकल्प है।
हर बच्चे के भीतर छिपी है एक बड़ी संभावना
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कक्षा में बैठा हर बच्चा अपने भीतर अनगिनत संभावनाएं लेकर आता है।
कोई भविष्य में बन सकता है—
🔬 वैज्ञानिक | 🏅 खिलाड़ी | 🩺 डॉक्टर | 🌾 किसान | 👨🏫 शिक्षक | 🎨 कलाकार | 🇮🇳 जनसेवक
कई बार बच्चे को स्वयं अपनी क्षमता का पता नहीं होता, लेकिन शिक्षक की पारखी नजर उसकी प्रतिभा को पहचान सकती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षक द्वारा बोला गया प्रोत्साहन का एक वाक्य भी किसी बच्चे को जीवन भर आगे बढ़ने की शक्ति दे सकता है।
CM साय का शिक्षकों से खास आग्रह: पीछे छूट रहे बच्चे का हाथ थामिए
शिक्षक दिवस पर मुख्यमंत्री ने गुरुजनों से बेहद आत्मीय आग्रह किया—
“हर बच्चे के भीतर छिपी संभावना को पहचानिए। विशेषकर उस बच्चे का हाथ अवश्य थामिए, जो अभाव में है, संकोच में है या किसी कारण पीछे छूट रहा है।”
उन्होंने कहा कि हो सकता है शिक्षक का थोड़ा-सा विश्वास किसी बच्चे के पूरे जीवन की दिशा बदल दे।
शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं है, बल्कि बच्चे के व्यक्तित्व, आत्मविश्वास, संस्कार और क्षमताओं का विकास करना भी है।
शिक्षकों से मिले संस्कारों को बताया जीवन की पूंजी
मुख्यमंत्री साय ने अपने पत्र में गुरुजनों के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि शिक्षक दिवस पर वे केवल मुख्यमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि गांव के एक छोटे से स्कूल में पढ़ने वाले उस विद्यार्थी के रूप में भी सभी शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त करते हैं, जिसने अपने गुरुजनों से मिले संस्कार और सीख को जीवन की पूंजी माना।
उन्होंने कहा कि समय के साथ स्कूल बदलेंगे, पढ़ाने और सीखने के साधन बदलेंगे और आधुनिक तकनीक शिक्षा को और आगे ले जाएगी।
लेकिन—
गुरु और शिष्य के बीच विश्वास, स्नेह और संस्कार का रिश्ता कभी पुराना नहीं होगा।
हर स्कूल बने सपनों का द्वार, हर कक्षा संभावनाओं का संसार
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के शिक्षकों से आह्वान किया कि सभी मिलकर ऐसा छत्तीसगढ़ बनाएं—
🏫 हर स्कूल सपनों का द्वार बने।
📖 हर कक्षा संभावनाओं का संसार बने।
🧑🏫 हर शिक्षक विद्यार्थी के जीवन में आशा का दीप जलाए।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों के ज्ञान से बच्चों का भविष्य उज्ज्वल हो, उनके संस्कारों से समाज समृद्ध हो और उनके मार्गदर्शन से छत्तीसगढ़ की नई पीढ़ी आत्मविश्वास के साथ विकसित भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाए।
गुरुजनों को CM साय का नमन
शिक्षक दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश के सभी गुरुजनों को सादर नमन करते हुए उनके स्वस्थ, सुखी और यशस्वी जीवन की कामना की। उन्होंने सभी शिक्षकों और उनके परिवारों को शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं भी दीं।
