NHAI Toll Scam: फर्जी सॉफ्टवेयर से करोड़ों की टोल वसूली का खेल, ED की देशभर में बड़ी छापेमारी

नई दिल्ली। NHAI टोल प्लाजा पर कथित फर्जीवाड़े और अवैध टोल वसूली के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार सुबह देशभर में बड़ी कार्रवाई शुरू की। जांच एजेंसी ने उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू, मध्य प्रदेश, NCR और कोलकाता समेत कई राज्यों में स्थित ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया।

फर्जी सॉफ्टवेयर बनाकर सरकारी सिस्टम को लगाया चूना

जांच के मुताबिक, आरोपियों ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के आधिकारिक टोल सिस्टम के समानांतर एक फर्जी सॉफ्टवेयर सिस्टम तैयार किया था। इसी के जरिए कथित तौर पर टोल की रकम को सरकारी रिकॉर्ड से अलग कर अवैध तरीके से जमा किया गया।

मामले की शुरुआती जांच उत्तर प्रदेश STF ने की थी। जांच में कथित तौर पर सामने आया कि टोल कलेक्शन की वास्तविक राशि का महज 5 प्रतिशत हिस्सा सरकारी रिकॉर्ड में दर्शाया गया, जबकि शेष 95 प्रतिशत रकम के गबन का आरोप है। इस तरह फर्जीवाड़े के जरिए करोड़ों रुपये की हेराफेरी किए जाने की बात सामने आई है।

दो FIR के बाद ED ने शुरू की जांच

इस मामले में दर्ज दो पुलिस FIR का संज्ञान लेने के बाद ED ने मनी लॉन्ड्रिंग और अपराध से अर्जित रकम की जांच शुरू की। FIR में आरोप लगाया गया था कि फर्जी सॉफ्टवेयर के जरिए टोल रसीदें तैयार की जाती थीं और वास्तविक टोल कलेक्शन को आधिकारिक अकाउंटिंग सिस्टम से अलग रखा जाता था।

फोरेंसिक जांच में सामने आया फर्जी सिस्टम

ED की जांच में NHAI के रिकॉर्ड और फोरेंसिक विश्लेषण के आधार पर कथित फर्जी सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल की पुष्टि होने की बात कही गई है। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे और कथित धोखाधड़ी से अर्जित रकम कहां और किस तरह इस्तेमाल की गई।

डिजिटल सबूत जुटाने पर ED का फोकस

ED की ताजा कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य कथित टोल घोटाले से जुड़े डिजिटल साक्ष्य जुटाना, आरोपियों की पहचान करना और अपराध से अर्जित धन का पता लगाना है। देश के कई राज्यों में एक साथ चल रही इस कार्रवाई से टोल वसूली से जुड़े बड़े नेटवर्क के सामने आने की संभावना है।

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