डॉ. वर्णिका शर्मा की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक, बाल श्रम कराने वालों पर बहुस्तरीय कानूनी कार्रवाई और पीड़ित बच्चों के त्वरित पुनर्वास पर जोर
रायपुर: छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने बाल श्रम के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि अब रेस्क्यू किए गए प्रत्येक बाल श्रमिक के मामले में केवल बचाव अभियान ही नहीं, बल्कि एफआईआर, कानूनी कार्रवाई और समयबद्ध पुनर्वास भी अनिवार्य होगा। आयोग ने बाल श्रम के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाते हुए सभी संबंधित विभागों को समन्वित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा की अध्यक्षता में आयोग कार्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में श्रम विभाग के उप श्रम आयुक्त, सहायक श्रम अधिकारी तथा एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन के राज्य समन्वयक विपिन ठाकुर सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
हर रेस्क्यू किए गए बच्चे को CWC के समक्ष पेश करना होगा
बैठक में आयोग ने निर्देश दिए कि प्रत्येक मुक्त कराए गए बाल श्रमिक को अनिवार्य रूप से बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष प्रस्तुत किया जाए, ताकि किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 के तहत उसके संरक्षण, देखरेख और पुनर्वास की विधिक प्रक्रिया सुनिश्चित हो सके।
आर्थिक सहायता में देरी पर आयोग ने जताई चिंता
समीक्षा के दौरान यह सामने आया कि रेस्क्यू किए गए बच्चों को शासन द्वारा मिलने वाली आर्थिक सहायता और क्षतिपूर्ति राशि के वितरण में काफी देरी हो रही है। इस पर डॉ. वर्णिका शर्मा ने नाराजगी जताते हुए कहा कि आर्थिक सहायता में विलंब बच्चों के प्रभावी पुनर्वास में बड़ी बाधा बनता है। उन्होंने पात्र सभी बच्चों को समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
अब कई कानूनों के तहत दर्ज होगी FIR
बैठक में निर्णय लिया गया कि बाल श्रम के मामलों में कार्रवाई केवल बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 तक सीमित नहीं रहेगी। प्रकरण की गंभीरता के अनुसार भारतीय न्याय संहिता (BNS), किशोर न्याय अधिनियम-2015, बंधुआ मजदूरी प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम-1976 सहित अन्य लागू कानूनों के तहत भी तत्काल एफआईआर दर्ज कर प्रभावी अभियोजन सुनिश्चित किया जाएगा।
शिक्षा और सम्मानजनक जीवन से जोड़ने पर जोर
बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि बाल श्रमिकों का पुनर्वास केवल कानूनी प्रक्रिया तक सीमित न रहे। उन्हें शिक्षा, कौशल विकास, सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन से जोड़ने के लिए सभी विभाग मिलकर कार्य करें। साथ ही प्रत्येक जिले में गठित बाल श्रम टास्क फोर्स और बंधुआ मजदूरों की सतर्कता समिति के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी सहमति बनी।
श्रम अधिकारियों को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण
आयोग ने सभी जिलों के श्रम अधिकारियों और श्रम निरीक्षकों के लिए बाल श्रम बचाव, कानूनी कार्रवाई और पुनर्वास से जुड़े विषयों पर विशेष प्रशिक्षण एवं नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित करने के निर्देश दिए। उनकी अनुपालन रिपोर्ट आयोग को भेजना भी अनिवार्य किया गया।
बैठक के अंत में आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि “किसी भी बच्चे का बचपन श्रम की भेंट नहीं चढ़ने दिया जाएगा। बाल श्रम कराने वाले प्रत्येक दोषी के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई होगी और प्रत्येक मुक्त बच्चे को सुरक्षित, शिक्षित एवं सम्मानजनक भविष्य दिलाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।”
