आंखों के नीचे काले घेरे केवल थकान नहीं, लिवर से भी हो सकता है संबंध

आज के दौर में आंखों के नीचे काले घेरे यानी डार्क सर्कल्स एक आम समस्या बन चुके हैं। आमतौर पर लोग इसे कम नींद, अधिक स्क्रीन टाइम या थकान का नतीजा मानते हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि डार्क सर्कल्स किसी एक वजह से नहीं, बल्कि कई कारणों के संयुक्त प्रभाव से बढ़ते हैं। इनमें एक महत्वपूर्ण और अक्सर नजरअंदाज किया जाने वाला कारण लिवर की सेहत भी हो सकता है।

लिवर और डार्क सर्कल्स के बीच गहरा संबंध माना जाता है। लिवर का प्रमुख कार्य शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालना होता है। जब लिवर सही ढंग से काम नहीं करता या उस पर अधिक दबाव पड़ता है, तो इसका असर चेहरे पर दिखने लगता है। खराब खानपान, अत्यधिक शराब सेवन, अनियमित जीवनशैली और नींद की कमी से लिवर सुस्त हो सकता है। ऐसे में चेहरा मुरझाया हुआ दिखाई देता है और आंखों के नीचे कालापन अधिक उभरकर नजर आने लगता है।

हालांकि, यह जरूरी नहीं कि हर डार्क सर्कल्स लिवर से ही जुड़े हों। अधिकांश मामलों में इसके पीछे जेनेटिक कारण, अधिक स्क्रीन टाइम, शारीरिक थकान, तनाव और पानी की कमी जैसे कारक भी जिम्मेदार होते हैं।

यह पहचानना हमेशा आसान नहीं होता कि डार्क सर्कल्स सामान्य हैं या लिवर से संबंधित समस्या का संकेत। लेकिन यदि लिवर से जुड़ी परेशानी के कारण डार्क सर्कल्स हो रहे हों, तो इसके साथ कुछ अन्य लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। इनमें चेहरे की चमक का कम होना, आंखों के नीचे सूजन, त्वचा का हल्का पीला पड़ना, लगातार थकान महसूस होना, ऊर्जा की कमी और पाचन संबंधी समस्याएं शामिल हो सकती हैं। वहीं सामान्य डार्क सर्कल्स आमतौर पर केवल आंखों के आसपास सीमित रहते हैं और पर्याप्त नींद, पानी का सेवन और उचित देखभाल से धीरे-धीरे कम हो जाते हैं।

डार्क सर्कल्स को कम करने के लिए सबसे जरूरी है उनके कारण को समझना। यदि समस्या पिगमेंटेशन से जुड़ी है, तो विटामिन सी, नायसिनमाइड, कोजिक एसिड या कैफीन युक्त अंडर-आई क्रीम का उपयोग लाभकारी हो सकता है। इसके साथ ही रोजमर्रा की आदतों में सुधार करना भी आवश्यक है। नियमित और पर्याप्त नींद लें, भरपूर पानी पिएं, धूप में निकलते समय सनस्क्रीन का उपयोग करें, आंखों के नीचे हल्की मसाज करें और स्क्रीन टाइम को सीमित रखें। सही जीवनशैली अपनाकर डार्क सर्कल्स की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

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