Dev Uthani Ekadashi 2025: भक्ति और परंपरा का संगम – तुलसी विवाह से गूंजा मुख्यमंत्री निवास
रायपुर। आज पूरे देश में Dev Uthani Ekadashi 2025 का पर्व बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं, जिससे शुभ कार्यों की शुरुआत होती है। देवशयनी एकादशी से लेकर देवउठनी एकादशी तक का यह चार महीनों का समय “चातुर्मास” कहलाता है, जिसमें विवाह, गृहप्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य वर्जित रहते हैं।
धार्मिक महत्व और परंपरा
हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, कार्तिक शुक्ल एकादशी के दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर से उठकर पुनः भक्तों के कल्याण के कार्यों में प्रवृत्त होते हैं। इस पवित्र दिन को प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है। इस अवसर पर मंदिरों में विशेष सजावट की जाती है, भजन-कीर्तन और दीपदान का आयोजन होता है। श्रद्धालु व्रत रखकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करते हैं।
छत्तीसगढ़ में विशेष आयोजन
छत्तीसगढ़ के मंदिरों में भी आज सुबह से भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। रायपुर, बिलासपुर, जांजगीर और बेमेतरा जैसे शहरों के प्रमुख विष्णु मंदिरों में Dev Uthani Ekadashi 2025 के उपलक्ष्य में विशेष पूजा और सत्संग का आयोजन किया गया। मंदिरों में हजारों दीप जलाकर भगवान विष्णु का स्वागत किया गया।
मांगलिक कार्यों की शुरुआत
देवउठनी एकादशी के साथ ही अब विवाह, गृहप्रवेश और नए कार्यों की शुरुआत का शुभ समय शुरू हो गया है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस वर्ष देवउठनी एकादशी का मुहूर्त 2 नवंबर की रात से शुरू होकर 3 नवंबर की सुबह तक रहेगा। यह तिथि धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ मानी गई है।
