रायपुर में टैक्स वसूली बनाम मूलभूत सुविधाएं: क्या नगर निगम सही प्राथमिकताओं पर काम कर रहा है?
रायपुर। राजधानी रायपुर में नगर निगम द्वारा राजस्व वसूली को लेकर लगातार बैठकों और समीक्षा बैठकों का दौर जारी है। निगम प्रशासन प्रतिदिन करोड़ों रुपये की टैक्स वसूली का लक्ष्य तय कर अधिकारियों पर दबाव बना रहा है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या इसी गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ शहर की मूलभूत सुविधाओं पर भी काम किया जा रहा है?
शहरवासियों का कहना है कि यदि राजस्व वसूली जितना ध्यान पेयजल, स्वच्छता, जल निकासी और बुनियादी सुविधाओं पर दिया जाता, तो आज लोगों को पीने के पानी और जलभराव जैसी समस्याओं से जूझना नहीं पड़ता।
टैक्स से पहले सुविधाएं जरूरी
नगर निगम का उद्देश्य केवल कर संग्रह करना नहीं, बल्कि नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना भी है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब तक राजधानी के नागरिकों को शत-प्रतिशत मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलतीं, तब तक लगातार टैक्स वसूली पर जोर कितना उचित है?
149 करोड़ रुपये के बकाया पर भी हो पहल
नगर निगम से जुड़े जानकारों का मानना है कि ट्रिपल इंजन सरकार के दौर में निगम को शासन स्तर पर लंबित लगभग 149 करोड़ रुपये की राशि दिलाने के लिए भी गंभीर पहल होनी चाहिए। यदि यह राशि निगम को प्राप्त होती है तो शहर की आधारभूत संरचना, सफाई व्यवस्था, जल निकासी और अन्य विकास कार्यों को गति मिल सकती है।
शहरवासियों के सामने बड़े सवाल
आज भी राजधानी के नागरिक कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब तलाश रहे हैं—
1. क्या रायपुर के हर नागरिक को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो रहा है?
कई इलाकों में आज भी पानी का दबाव कम होने और अनियमित जलापूर्ति की शिकायतें सामने आती हैं।
2. क्या शहर को गंदगी और कचरे की समस्या से पूरी तरह राहत मिली है?
स्वच्छता व्यवस्था में सुधार के बावजूद कई वार्डों में नागरिक अब भी समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
3. क्या मूलभूत सुविधाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रही हैं?
राजधानी के कई बाहरी और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में नागरिक सुविधाओं को लेकर सवाल बने हुए हैं।
4. क्या इस बार जलभराव से मिलेगी राहत?
मानसून नजदीक है और हर साल की तरह इस बार भी शहरवासियों की चिंता जलभराव को लेकर बनी हुई है।
जलभराव रोकने की क्या है तैयारी?
नगर निगम प्रशासन से यह अपेक्षा की जा रही है कि वह मानसून से पहले अपनी कार्ययोजना सार्वजनिक करे। नालों की सफाई, जल निकासी व्यवस्था, संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने जैसे कदम कितने प्रभावी हैं, यह आने वाली बारिश में साफ हो जाएगा।
पानी के मीटर पर भी उठ रहे सवाल
शहर में जल मीटर लगाने की चर्चा के बीच नागरिक यह भी पूछ रहे हैं कि पूर्व में लगाए गए मीटरों की वर्तमान स्थिति क्या है और उनसे क्या लाभ मिला? जब कई क्षेत्रों में पर्याप्त दबाव से पानी तक उपलब्ध नहीं हो रहा, तब नई योजनाओं पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
जनता चाहती है जवाबदेही और परिणाम
रायपुर की जनता चाहती है कि निगम प्रशासन केवल राजस्व वसूली तक सीमित न रहे, बल्कि जमीनी स्तर पर जाकर नागरिकों की समस्याओं को समझे और उनका समाधान सुनिश्चित करे। आखिरकार नगर निगम की सबसे बड़ी जिम्मेदारी शहरवासियों को बेहतर और सुगम जीवन उपलब्ध कराना है।
अब देखना यह होगा कि आने वाले मानसून में राजधानी जलभराव से मुक्त रहती है या फिर हर साल की तरह समस्याएं दोहराई जाती हैं। साथ ही, क्या नगर निगम टैक्स वसूली के साथ-साथ नागरिक सुविधाओं को भी अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाएगा, यह भी एक बड़ा सवाल है।
