Nagastra-2 Attack Drone: भारतीय सेना को मिला स्वदेशी नागास्त्र-2 अटैक ड्रोन, 50 किमी की रेंज और टैंक भेदने की क्षमता
नई दिल्ली। भारतीय सेना की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में नागास्त्र-2 लॉइटरिंग म्यूनिशन की आपूर्ति शुरू होने की खबर सामने आई है। नागपुर स्थित सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड द्वारा विकसित यह सिस्टम निगरानी और सटीक हमले के लिए तैयार किया गया है। कंपनी के अनुसार, इसकी परिचालन रेंज 50 किलोमीटर तक है और यह अधिकतम 60 मिनट तक हवा में रह सकता है।
नागास्त्र-2 को खास तौर पर टैंक और अन्य बख्तरबंद वाहनों जैसे लक्ष्यों के खिलाफ इस्तेमाल के लिए डिजाइन किया गया है। आधुनिक युद्ध में ऐसे सिस्टम की अहमियत बढ़ रही है, क्योंकि इनमें लक्ष्य वाले क्षेत्र की निगरानी करने और जरूरत पड़ने पर हमला करने की क्षमता एक साथ मौजूद होती है।
क्या है नागास्त्र-2 अटैक ड्रोन?
नागास्त्र-2 एक फिक्स्ड-विंग लॉइटरिंग म्यूनिशन है। इसे सामान्य निगरानी ड्रोन से अलग समझना जरूरी है। सामान्य ड्रोन जहां मुख्य रूप से निगरानी या जानकारी जुटाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं, वहीं लॉइटरिंग म्यूनिशन लक्ष्य वाले क्षेत्र में मंडराने और लक्ष्य की पहचान के बाद हमला करने के लिए डिजाइन किए जाते हैं।
इस सिस्टम में दिन और रात के दौरान निगरानी करने वाले कैमरे दिए गए हैं। इनकी मदद से लक्ष्य वाले क्षेत्र की जानकारी प्राप्त करने में सहायता मिलती है। हालांकि, इसकी वास्तविक परिचालन क्षमता परिस्थितियों और इस्तेमाल की जाने वाली प्रणाली पर निर्भर करती है।
नागास्त्र-2 की 5 प्रमुख खासियतें
1. 50 किलोमीटर तक की परिचालन रेंज
कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, नागास्त्र-2 की घोषित परिचालन रेंज 50 किलोमीटर तक है। यह क्षमता सेना को निर्धारित दूरी पर मौजूद लक्ष्यों के खिलाफ कार्रवाई का विकल्प उपलब्ध करा सकती है।
2. 60 मिनट तक हवा में रहने की क्षमता
नागास्त्र-2 अधिकतम 60 मिनट तक हवा में रह सकता है। इससे लक्ष्य वाले क्षेत्र की निगरानी करने और उपयुक्त अवसर पर कार्रवाई करने की क्षमता मिलती है।
3. बख्तरबंद वाहनों के खिलाफ इस्तेमाल
इस सिस्टम में 4 किलोग्राम का टैंडम शेप्ड-चार्ज वॉरहेड बताया गया है। कंपनी के अनुसार, इसे 650 मिलीमीटर तक के रोल्ड होमोजीनियस आर्मर (RHA) को भेदने के लिए डिजाइन किया गया है। यह विनिर्देश नियंत्रित परीक्षण परिस्थितियों से संबंधित है; वास्तविक परिणाम लक्ष्य और परिस्थितियों के अनुसार अलग हो सकते हैं।
4. दिन और रात में निगरानी
नागास्त्र-2 में दिन और रात के दौरान काम करने वाले कैमरे दिए गए हैं। इनकी मदद से अलग-अलग रोशनी वाली परिस्थितियों में लक्ष्य की पहचान और निगरानी करने में सहायता मिल सकती है।
5. इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से निपटने की क्षमता
नागास्त्र-2 में इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-काउंटरमेजर्स (ECCM) क्षमता होने की जानकारी दी गई है। इसका उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक हस्तक्षेप या जैमिंग जैसी चुनौतियों के बीच सिस्टम की कार्यक्षमता बनाए रखने में मदद करना है।
अगस्त 2026 में पूरे किए तकनीकी परीक्षण
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नागास्त्र-2 ने अगस्त 2026 में राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में तकनीकी परीक्षण पूरे किए। इन परीक्षणों में सिस्टम की कार्यक्षमता और इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा से जुड़े पहलुओं का आकलन किया गया।
हालांकि, आपूर्ति की कुल संख्या, चरणबद्ध डिलीवरी और सेना में इसकी पूर्ण परिचालन तैनाती से जुड़ी जानकारी की पुष्टि के लिए आधिकारिक घोषणा आवश्यक है।
आत्मनिर्भर भारत के लिए क्यों अहम है नागास्त्र-2?
नागास्त्र-2 का विकास देश में रक्षा उपकरणों के स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। घरेलू रक्षा कंपनियों की भागीदारी से भारतीय सेना की जरूरतों के अनुरूप उपकरण विकसित करने और रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
कंपनी इससे पहले नागास्त्र-1R की 450 इकाइयों की खेप भारतीय सेना को देने की जानकारी भी दे चुकी है। नागास्त्र-1R और नागास्त्र-2 अलग-अलग संस्करण हैं, इसलिए उनकी क्षमताओं और तकनीकी विशेषताओं को एक जैसा नहीं मानना चाहिए।
आधुनिक युद्ध में बढ़ रहा है लॉइटरिंग म्यूनिशन का महत्व
आधुनिक युद्ध में ड्रोन आधारित निगरानी और हमले की प्रणालियों का महत्व बढ़ा है। लॉइटरिंग म्यूनिशन निगरानी तथा हमला करने की क्षमताओं को एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराते हैं। यही वजह है कि विभिन्न देश अपनी रक्षा प्रणालियों में इस तरह की तकनीक को शामिल करने पर ध्यान दे रहे हैं।
