MP News: इंदौर-उज्जैन-भोपाल बनेंगे मेट्रोपॉलिटन सिटी, 2047 तक 20 लाख रोजगार का लक्ष्य; डेला ग्रुप करेगा ₹2,250 करोड़ का निवेश

भोपाल/इंदौर। मध्यप्रदेश में शहरी विकास, औद्योगिक निवेश और रोजगार सृजन को नई गति देने के लिए राज्य सरकार ने दीर्घकालीन योजनाओं पर काम तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर में आयोजित मध्यप्रदेश अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 का शुभारंभ करते हुए कहा कि इंदौर, उज्जैन और भोपाल को मेट्रोपॉलिटन सिटी के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2047 तक इस क्षेत्र में लगभग 20 लाख रोजगार के अवसर सृजित करना और 12 से 15 नई टाउनशिप विकसित करना है।

कॉन्क्लेव में शहरी अधोसंरचना, निवेश, आवास, जल प्रबंधन, पर्यटन और आधुनिक तकनीक से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। इस दौरान इंदौर इकोनॉमिक रीजन-2047 की आर्थिक योजना रिपोर्ट का विमोचन किया गया और शहरी विकास से संबंधित नीतियों के प्रारूप जारी किए गए।

2047 तक 20 लाख रोजगार, 30 हजार एकड़ में नियोजित विकास

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इंदौर, उज्जैन और भोपाल क्षेत्र को आधुनिक, निवेश-अनुकूल और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए नियोजित शहरी विकास पर जोर दिया जा रहा है।

प्रस्तावित योजना के प्रमुख लक्ष्य हैं:

  • वर्ष 2047 तक लगभग 20 लाख रोजगार के अवसर सृजित करना।
  • 12 से 15 नई टाउनशिप विकसित करना।
  • लगभग 25 से 30 हजार एकड़ क्षेत्र में नियोजित शहरी विकास करना।
  • इंदौर फ्यूचर सिटी में करीब 5 हजार एकड़ क्षेत्र में आवास, उद्योग और रोजगार आधारित विकास करना।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शहर केवल आवासीय क्षेत्र नहीं, बल्कि उद्योग, व्यापार, निवेश और रोजगार के प्रमुख केंद्र हैं। इसलिए शहरी विकास को आधुनिक अधोसंरचना, जल सुरक्षा, किफायती आवास और बेहतर जीवन गुणवत्ता से जोड़ना जरूरी है।

मध्यप्रदेश में 12 लाख करोड़ रुपये के निवेश को धरातल पर उतारने का दावा

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में अब तक लगभग 12 लाख करोड़ रुपये के निवेश को धरातल पर उतारा जा चुका है। सरकार औद्योगिक कॉरिडोर, सड़क नेटवर्क, लॉजिस्टिक्स, पर्यटन, नवकरणीय ऊर्जा, जल प्रबंधन और आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा दे रही है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश में उद्योग, तकनीकी विकास और रोजगार के अवसर बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। कॉन्क्लेव से प्रदेश में निवेश को प्रोत्साहन मिलने और ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027 के लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ने की उम्मीद है।

डेला ग्रुप करेगा 2,250 करोड़ रुपये का निवेश

कॉन्क्लेव में निवेश और शहरी विकास से जुड़ी विभिन्न संभावनाओं पर चर्चा हुई। जारी जानकारी के अनुसार, डेला ग्रुप मध्यप्रदेश में 2,250 करोड़ रुपये का निवेश करेगा। इसके अतिरिक्त भोपाल में लक्जरी रेसकोर्स परियोजना विकसित करने की योजना भी सामने आई।

मुख्यमंत्री ने विभिन्न कंपनियों और संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ वन-टू-वन चर्चा कर निवेश प्रस्तावों तथा शहरी अधोसंरचना में भागीदारी की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया।

2,013 करोड़ रुपये की शहरी परियोजनाओं के लिए एमओयू

अर्बन चैलेंज फंड के अंतर्गत 2,013 करोड़ रुपये की शहरी अधोसंरचनात्मक परियोजनाओं के लिए वित्तीय समझौते किए गए। कॉन्क्लेव में जल संरक्षण, उपचारित जल के पुनः उपयोग, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और शहरी विकास में तकनीकी सहयोग बढ़ाने के लिए छह एमओयू भी किए गए।
मुख्यमंत्री ने दो महत्वपूर्ण नीतियों के प्रारूप जारी किए:

  • उपचारित अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण एवं पुनः उपयोग नीति-2026।
  • मध्यप्रदेश अर्बन अफोर्डेबल हाउसिंग एंड हैबिटेट पॉलिसी-2026।

उपचारित जल के पुनः उपयोग का लक्ष्य वर्ष 2037 तक 50 प्रतिशत निर्धारित किया गया है। इन पहलों का उद्देश्य जल संसाधनों का बेहतर उपयोग और शहरी नागरिकों के लिए किफायती आवास की उपलब्धता बढ़ाना है।

इंदौर इकोनॉमिक रीजन-2047 की योजना रिपोर्ट जारी

कॉन्क्लेव में नीति आयोग की इंदौर इकोनॉमिक रीजन (IER)-2047 रिपोर्ट का विमोचन किया गया। इसमें मालवा-निमाड़ के आठ जिलों के आर्थिक विकास के लिए वर्ष 2047 तक की रूपरेखा प्रस्तुत की गई है।

रिपोर्ट में उद्योग, कृषि, पर्यटन और रोजगार से जुड़ी 60 से अधिक परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। इसके साथ ही भोपाल और इंदौर नगर निगम की सतत विकास रिपोर्ट तथा मध्यप्रदेश एकीकृत भूमि विकास एवं भवन प्रोत्साहन नियम-2026 के प्रारूप को जन परामर्श के लिए प्रस्तुत किया गया।

इंदौर फ्यूचर सिटी में आवास और उद्योग का विस्तार

मुख्यमंत्री ने कहा कि इंदौर फ्यूचर सिटी में लगभग 5 हजार एकड़ क्षेत्र में आवास, उद्योग और रोजगार आधारित विकास की योजना है। इसका उद्देश्य भविष्य की शहरी जरूरतों के अनुरूप नियोजित विकास करना और निवेश के नए अवसर उपलब्ध कराना है।

उन्होंने कहा कि शहरों में आधुनिक परिवहन, डिजिटल गवर्नेंस, किफायती आवास, स्वच्छ ऊर्जा और अपशिष्ट प्रबंधन जैसी सुविधाओं का विकास जरूरी है। कॉन्क्लेव में प्रदर्शित अर्बन इनोवेशन गैलरी में प्रदेश की प्रमुख नगरीय परियोजनाओं और निवेश संभावनाओं की जानकारी भी प्रस्तुत की गई।

उज्जैन में धार्मिक पर्यटन से बढ़ीं आर्थिक गतिविधियां

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन में श्री महाकाल महालोक के विकास के बाद धार्मिक पर्यटन का विस्तार हुआ है। उनके अनुसार, प्रतिवर्ष लगभग 7 करोड़ लोगों के उज्जैन आने से होटल, परिवहन, व्यापार, रोजगार और रियल एस्टेट सहित विभिन्न क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों के अवसर बढ़े हैं।

उन्होंने इंदौर से अबू धाबी की उड़ान का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार अंतरराष्ट्रीय हवाई संपर्क को बढ़ावा देने के लिए सहायता उपलब्ध करा रही है। बेहतर सड़क नेटवर्क और औद्योगिक कॉरिडोर के विस्तार से क्षेत्रीय आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।

शहरों को आर्थिक विकास का इंजन बनाने पर जोर

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि भविष्य की विकास योजनाओं में शहरीकरण को केंद्र में रखना जरूरी है। शहर केवल सड़क, आवास और ड्रेनेज तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आर्थिक विकास के प्रमुख इंजन हैं।

उन्होंने इंदौर की स्वच्छता में नागरिक भागीदारी की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि जनसहयोग से शहर ने देश और दुनिया में अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने इंदौर में आईटी क्षेत्र के विस्तार और शहर के अनुकूल वातावरण को भी महत्वपूर्ण बताया।

जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने कहा कि इंदौर प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और यहां आयोजित विचार-विमर्श से विकास की नई संभावनाओं को गति मिल सकती है।

इंदौर की जीडीपी पांच वर्षों में दोगुनी करने का लक्ष्य

सांसद शंकर लालवानी ने कहा कि इंदौर के विकास के लिए तैयार दीर्घकालीन ब्लूप्रिंट को नीति आयोग की मान्यता मिलना महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में इंदौर की जीडीपी लगभग 10 वर्षों में दोगुनी हो रही है और आने वाले समय में इसे पांच वर्षों में दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

अपर मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं आवास संजय दुबे ने कहा कि मध्यप्रदेश में नियोजित शहरी विकास, आधुनिक अधोसंरचना और निवेश-अनुकूल नीतियों के माध्यम से शहरों को आर्थिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।

निवेश, रोजगार और आधुनिक शहरी विकास पर सरकार का फोकस

मध्यप्रदेश अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 में शहरी विकास के साथ उद्योग, पर्यटन, आवास, जल संरक्षण और रोजगार सृजन को जोड़ने पर जोर दिया गया। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2047 तक प्रदेश की अर्थव्यवस्था और शहरों को दीर्घकालीन विकास योजनाओं के अनुरूप तैयार करना है।

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