MP में 4 फास्ट ट्रैक कोर्ट बनेंगे, 3 महीने में होंगे पेपर लीक और परीक्षा विवादों के फैसले: CM मोहन यादव

कृषक कल्याण वर्ष 2026: किसानों के लिए सरकार का बड़ा अभियान, 13 नवंबर तक पूरे प्रदेश में होंगे बलराम कृषि महोत्सव

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार के लिए किसानों का कल्याण सर्वोपरि है। कृषक कल्याण वर्ष-2026 के तहत प्रदेशभर में किसानों की आय बढ़ाने, आधुनिक खेती को बढ़ावा देने और कृषि तकनीक से जोड़ने के उद्देश्य से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में बलराम कृषि महोत्सव का आयोजन 15 जुलाई से शुरू हो चुका है और यह अभियान 13 नवंबर तक प्रदेश के सभी जिलों में चलेगा।

किसानों को हेलमेट वितरण का अनूठा नवाचार

मुख्यमंत्री ने शनिवार को दतिया से खरगोन में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को वर्चुअली संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश में सिंचाई का दायरा लगातार बढ़ रहा है और किसानों को पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराई जा रही है।

उन्होंने बताया कि कृषक कल्याण वर्ष के तहत एक अनूठी पहल करते हुए दोपहिया वाहन से दूध, सब्जियां और कृषि उत्पाद लेकर आने-जाने वाले किसानों को सड़क सुरक्षा के लिए हेलमेट भी वितरित किए जा रहे हैं। उन्होंने इसे किसानों की सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण नवाचार बताया।

13 नवंबर तक सभी जिलों में होंगे कृषि कार्यक्रम

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सभी जिलों में 13 नवंबर तक बलराम कृषि महोत्सव के साथ खेती-किसानी से जुड़े अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन आयोजनों के माध्यम से किसानों को नई कृषि तकनीक, आधुनिक उपकरण, उन्नत बीज और वैज्ञानिक खेती की जानकारी दी जाएगी।

उन्नत खेती अपनाकर बढ़ाएं आय

मुख्यमंत्री ने किसानों से आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने का आग्रह करते हुए कहा कि इससे उत्पादन और आय दोनों में वृद्धि होगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसानों को दिन और रात दोनों समय पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराई जाएगी।

उन्होंने बताया कि कृषक कल्याण वर्ष-2026 के तहत 16 विभागों की सहभागिता सुनिश्चित की गई है, ताकि किसानों की आय बढ़ाने के लिए समन्वित रोडमैप पर प्रभावी ढंग से काम किया जा सके।

खरगोन में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव में बड़ी संख्या में किसान, जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं आम नागरिक उपस्थित रहे।


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Balram Krishi Mahotsav 2026

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Balram Krishi Mahotsav 2026: CM Mohan Yadav Announces Statewide Farmers’ Campaign Till November 13

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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष 2026 के तहत 13 नवंबर तक पूरे मध्यप्रदेश में बलराम कृषि महोत्सव आयोजित होंगे। किसानों को आधुनिक खेती, तकनीक, पर्याप्त बिजली और हेलमेट वितरण जैसी सुविधाओं का लाभ मिलेगा।

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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. गोविंद नारायण सिंह की जयंती पर शनिवार को मध्यप्रदेश विधानसभा के सेंट्रल हॉल में उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। पुष्पांजलि कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष श्री नरेन्द्र सिंह तोमर, अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं पूर्व मुख्यमंत्री स्व. सिंह के परिजन उपस्थित थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राजनीति का उद्देश्य केवल सत्ता पाना नहीं, समाज का कल्याण करना है। आज की नई पीढ़ी को पूर्व मुख्यमंत्री स्व. गोविंद नारायण सिंह के जीवन से सेवा, समर्पण और नैतिकता की सीख लेनी चाहिए। वे बेहद सरल जीवन और सहज व्यवहार के लिए प्रसिद्ध थे। जनता से उनका सीधा संवाद उनकी सबसे बड़ी शक्ति था। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों और सामान्य नागरिकों की समस्याओं को निकट से समझा। ऐसे व्यक्तित्व सदैव समाज का मार्गदर्शन करते हैं। उनकी कार्यशैली आज भी जनप्रतिनिधियों के लिए प्रेरणास्रोत है। पूर्व मुख्यमंत्री स्व. सिंह का जीवन युवाओं को ईमानदारी, संघर्ष और राष्ट्र सेवा का संदेश देता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि श्री गोविन्द नारायण सिंह वर्ष 1967 में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बने, जब प्रदेश की राजनीति एक नए दौर से गुजर रही थी। उन्होंने प्रशासन में जवाबदेही और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का प्रयास किया. लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने और जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप शासन चलाने की दिशा में कार्य किया। उनका कार्यकाल राजनीतिक परिवर्तन का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज पूर्व मुख्यमंत्री स्व. सिंह की जयंती पर हम सभी उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लें। उनके दिखाए मार्ग पर चलते हुए हम विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के निर्माण के लिए कार्य करेंगे। प्रदेश में जनकल्याण, सुशासन और सतत् विकास के मार्ग पर लगातार आगे बढ़ना ही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी। पूर्व मुख्यमंत्री स्व. गोविंद नारायण सिंह का जन्म 25 जुलाई 1920 को रामपुर बघेलान में हुआ था। एम.ए., एलएलबी. तक शिक्षा ग्रहण कर उन्होंने अपने सार्वजनिक एवं राजनैतिक जीवन प्रारंभ किया। उन्होंने चतुर्थ विधानसभा (1967-1972) में 30 जुलाई 1967 से 12 मार्च 1969 तक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश के विकास को एक नई दिशा दी थी। श्री सिंह का 10 मई 2005 को देहावसान हो गया। मीडिया से चर्चा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुष्पांजलि कार्यक्रम के पश्चात मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा में कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री स्व. गोविंद नारायण सिंह राज्य में तत्कालीन संविद सरकार की राजनीति के केंद्र बिंदु थे। वे रीवा के निवासी थे। उन्होंने सादगी, निष्पक्षता के साथ समाज सेवा के क्षेत्र में विशेष पहचान बनाई थी। पूर्व मुख्यमंत्री श्री सिंह ने स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आज उनकी जयंती के अवसर पर हम सभी उनका स्मरण कर रहे हैं। श्री सिंह ने राजमाता सिंधिया के कार्यकाल में जनता की आवाज बनकर यह भरोसा दिलाया था कि पक्ष हो या विपक्ष, अब राजनीति में बदलाव का समय है। पूर्व मुख्यमंत्री स्व. सिंह प्रदेश की राजनीति में लोकतांत्रिक परंपरा की मिसाल बने। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे विधानसभा अध्यक्ष श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व विधानसभा अध्यक्षों की जयंती और पुण्यतिथि पर पुष्पांजलि कार्यक्रम कराने की उत्कृष्ट पहल की है।

पूर्व मुख्यमंत्री गोविंद नारायण सिंह की जयंती: CM मोहन यादव ने दी श्रद्धांजलि, कहा- सेवा और नैतिकता से मिलेगी नई पीढ़ी को प्रेरणा

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. गोविंद नारायण सिंह की जयंती पर विधानसभा के सेंट्रल हॉल में उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, जनप्रतिनिधि और स्व. सिंह के परिजन भी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीति का उद्देश्य केवल सत्ता प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज का कल्याण करना है। उन्होंने नई पीढ़ी से आह्वान किया कि वे स्व. गोविंद नारायण सिंह के जीवन से सेवा, समर्पण, ईमानदारी और नैतिकता की प्रेरणा लें।

जनता से सीधा संवाद उनकी सबसे बड़ी ताकत था

डॉ. मोहन यादव ने कहा कि स्व. गोविंद नारायण सिंह अपनी सादगी, सहज व्यवहार और जनता से सीधे जुड़ाव के लिए जाने जाते थे। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों और आम नागरिकों की समस्याओं को करीब से समझते हुए जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उनकी कार्यशैली आज भी जनप्रतिनिधियों के लिए प्रेरणास्रोत है।

1967 में बने थे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 1967 में गोविंद नारायण सिंह ऐसे समय मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बने, जब प्रदेश की राजनीति एक नए दौर से गुजर रही थी। उन्होंने प्रशासन में जवाबदेही बढ़ाने, लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने और जनहितकारी शासन व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किए। उनका कार्यकाल प्रदेश के राजनीतिक इतिहास में बदलाव के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है।

आदर्शों पर चलने का लिया संकल्प

डॉ. यादव ने कहा कि स्व. गोविंद नारायण सिंह की जयंती पर उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लेना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने कहा कि जनकल्याण, सुशासन और सतत विकास के मार्ग पर आगे बढ़ते हुए विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश का निर्माण किया जाएगा।

मीडिया से चर्चा में कही यह बात

कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि स्व. गोविंद नारायण सिंह प्रदेश की तत्कालीन संविद सरकार की राजनीति के केंद्र में रहे और उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर द्वारा पूर्व मुख्यमंत्रियों और पूर्व विधानसभा अध्यक्षों की जयंती एवं पुण्यतिथि पर पुष्पांजलि कार्यक्रम आयोजित करने की पहल सराहनीय है।

गोविंद नारायण सिंह का संक्षिप्त परिचय

  • जन्म: 25 जुलाई 1920, रामपुर बघेलान
  • शिक्षा: एम.ए., एलएलबी
  • मुख्यमंत्री कार्यकाल: 30 जुलाई 1967 से 12 मार्च 1969
  • निधन: 10 मई 2005

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Govind Narayan Singh Birth Anniversary

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Govind Narayan Singh Birth Anniversary: CM Mohan Yadav Pays Tribute, Calls His Life an Inspiration for Youth

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पूर्व मुख्यमंत्री स्व. गोविंद नारायण सिंह की जयंती पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके जीवन को सेवा, समर्पण और नैतिकता का आदर्श बताया। उन्होंने युवाओं से उनके आदर्शों पर चलने का आह्वान किया।

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Department Of Public Relations M.P लाइव कार्यक्रम आर्थिक सर्वेक्षण वर्ष – 2025-26 नवीन सूचनाएँ e-संदेश-2026 e-रोजगार और निर्माण e-संदेश श्री महाकाल लोक प्रकाशन अब तक ऑनलाइन विज्ञापन दिनांक: शीर्षक: Krutidev Chanakya कमेंट ईमेल प्रिंट 0 व्यू फास्ट ट्रैक कोर्ट में 3 माह में होगा परीक्षा जैसे अन्य मामलों का निराकरण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सरकार शिक्षकों और विद्यार्थियों से जुड़े सभी विषयों पर अत्यंत संवेदनशील फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन के केन्द्र सरकार के निर्णय का सबसे पहले मध्यप्रदेश में अमल शुरू युवाओं और विद्यार्थियों के कल्याण की चिंता हमारा कर्तव्य मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विधानसभा परिसर में की मीडिया से चर्चा भोपाल : शनिवार, जुलाई 25, 2026, 14:29 IST मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश सरकार शिक्षक और विद्यार्थी वर्ग के कल्याण से जुड़े सभी विषयों पर अत्यंत गंभीर और संवेदनशील है। शिक्षा के क्षेत्र में सुधार और विद्यार्थियों के हित में लगातार महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा देश की जनता के हित में जब भी कोई निर्णय लिया जाता है, मध्यप्रदेश उसे लागू करने और निर्णय के अनुरूप नीतिगत व्यवस्था बनाने वाला पहला राज्य होता है। समय की जरूरत है कि युवाओं से संबंधित न्यायिक फैसले द्रुत गति से हों। इसके लिए मध्यप्रदेश में 4 फास्ट ट्रैक कोर्ट्स (भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में) बनाये जायेंगे। पेपर लीक और परीक्षा सहित अन्य मामलों का फास्ट ट्रैक कोर्ट में मात्र 3 माह में निराकरण किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शनिवार को मध्यप्रदेश विधानसभा स्थित सेंट्रल हॉल में मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा में यह जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के मन में विद्यार्थियों के कल्याण और उनसे जुड़े सभी विषयों को लेकर बेहद सकारात्मक भाव हैं। उन्होंने कहा कि जैसे ही नीट पेपर लीक की खबर सामने आई, उसकी जांच के लिए प्रधानमंत्री श्री मोदी ने तत्काल कार्रवाई करते हुए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) गठित की। प्रकरण दर्ज हुआ और देशभर में तेज गति से आरोपियों की गिरफ्तारियां भी की गई, फिर दोबारा नीट परीक्षा कराई गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार पूरी सहानुभूति और संवेदना विद्यार्थियों के साथ है। हम हर परिस्थिति में विद्यार्थियों के साथ खड़े हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भरोसा दिलाया कि भविष्य में नीट परीक्षाएं बेहतर और पारदर्शी तरीके से सम्पन्न हों, इसके लिए स्टैंडर्ड ऑफ प्रोटोकॉल्स (एसओपी) तैयार कर सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा मध्यप्रदेश वह राज्य है, जहां राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 देश में सबसे पहले लागू की गई। पिछले ढाई साल के कार्यकाल में राज्य सरकार ने 3 नए शासकीय विश्वविद्यालय प्रारंभ किए हैं। प्रदेश में विकास की गतिविधियों को गति देकर तेज़ी लाने के साथ-साथ युवाओं और विद्यार्थियों के लिए कल्याण की चिंता कर इनके हित में निर्णय लेना भी हमारा कर्तव्य है। विद्यार्थियों के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय हमारी सरकार ले चुकी है और यह आगे भी लगातार जारी रहेंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के कार्यकाल में मेडिकल कॉलेज की संख्या दोगुनी से अधिक हो चुकी है। पूरे देश में पहले मात्र 641 विश्वविद्यालय थे, आज इनकी संख्या बढ़कर 1400 से अधिक हो गई है। मेडिकल एजुकेशन की सीटें भी 50 हजार से बढ़कर 1 लाख से अधिक हो चुकी हैं।

MP में 4 फास्ट ट्रैक कोर्ट बनेंगे, 3 महीने में होंगे पेपर लीक और परीक्षा विवादों के फैसले: CM मोहन यादव

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि प्रदेश में भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में चार फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे। इन अदालतों में पेपर लीक, परीक्षा विवाद और विद्यार्थियों से जुड़े अन्य मामलों का अधिकतम तीन महीने के भीतर निराकरण किया जाएगा।

शनिवार को मध्यप्रदेश विधानसभा के सेंट्रल हॉल में मीडिया से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षकों और विद्यार्थियों से जुड़े हर मुद्दे पर बेहद संवेदनशील है और शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने के लिए लगातार कदम उठा रही है।

युवाओं को समय पर न्याय दिलाने की पहल

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं से जुड़े मामलों में न्याय में देरी नहीं होनी चाहिए। इसी उद्देश्य से चार प्रमुख शहरों में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे, जहां परीक्षा, पेपर लीक और अन्य संबंधित मामलों की सुनवाई तेजी से होगी और तीन महीने के भीतर फैसला देने का लक्ष्य रखा जाएगा।

केंद्र के फैसले को लागू करने वाला पहला राज्य

डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा लिए गए जनहित के निर्णयों को लागू करने और उनके अनुरूप नीतिगत व्यवस्था बनाने में मध्यप्रदेश हमेशा अग्रणी रहा है। उन्होंने कहा कि फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था लागू करने की दिशा में भी मध्यप्रदेश सबसे पहले कदम उठा रहा है।

NEET विवाद पर सरकार का रुख

मुख्यमंत्री ने कहा कि NEET पेपर लीक की जानकारी सामने आते ही केंद्र सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया, आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई और दोबारा परीक्षा आयोजित कराई गई। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विद्यार्थियों के साथ पूरी संवेदनशीलता से खड़ी है और भविष्य में परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोटोकॉल (SOP) तैयार किए जाएंगे।

शिक्षा क्षेत्र में हुए बड़े बदलाव

मुख्यमंत्री ने बताया कि मध्यप्रदेश राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू करने वाला देश का पहला राज्य है। पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश में तीन नए शासकीय विश्वविद्यालय शुरू किए गए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के कार्यकाल में देशभर में विश्वविद्यालयों और मेडिकल कॉलेजों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है तथा मेडिकल सीटें भी पहले की तुलना में दोगुनी से अधिक हो चुकी हैं।

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