‘मोर गांव-मोर पानी’ बना जनआंदोलन: 1610 करोड़ से एक लाख जल संरक्षण कार्य, 11 लाख लोगों को मिल रहा रोजगार

रायपुर। जलवायु परिवर्तन, अनिश्चित वर्षा और बढ़ते जल संकट के दौर में छत्तीसगढ़ का ‘मोर गांव-मोर पानी’ महाअभियान जल संरक्षण और ग्रामीण विकास का नया मॉडल बनकर उभर रहा है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत संचालित इस महत्वाकांक्षी अभियान के माध्यम से जल संरक्षण, रोजगार सृजन, महिला सशक्तिकरण और हरित विकास को एक साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।

राज्य सरकार की इस पहल ने जल संरक्षण को केवल सरकारी योजना तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे जनभागीदारी से जुड़े व्यापक सामाजिक आंदोलन का स्वरूप दे दिया है। गांव-गांव में जल स्रोतों के निर्माण और संरक्षण के लिए लोगों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है।

1610 करोड़ की लागत से बन रहे एक लाख से अधिक जल संरचनाएं

अभियान के तहत प्रदेशभर में लगभग 1610 करोड़ रुपये की लागत से एक लाख से अधिक जल संरक्षण एवं संवर्धन कार्य किए जा रहे हैं। इनमें तालाब, डबरियां, चेकडैम, खेत तालाब, जल संवर्धन संरचनाएं और स्टैगर्ड कंटूर ट्रेंच (SCT) जैसे कार्य शामिल हैं।

इन परियोजनाओं का उद्देश्य वर्षा जल को अधिकतम मात्रा में भूमि में रोकना, भू-जल स्तर को बढ़ाना और ग्रामीण क्षेत्रों में सालभर जल उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

जल संरक्षण के साथ 11 लाख लोगों को रोजगार

‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक रोजगार सृजन भी है। वर्तमान में इन कार्यों के माध्यम से प्रदेश में प्रतिदिन 11 लाख से अधिक श्रमिकों को रोजगार मिल रहा है, जिनमें 57 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं।

इससे न केवल ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ रही है, बल्कि महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिल रही है।

डबरियों और तालाबों से बढ़ रही ग्रामीण आय

राज्य सरकार ने जल संरक्षण को आजीविका से जोड़ने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की है। समाज के कमजोर और संवेदनशील वर्गों की निजी भूमि पर 13,065 आजीविका डबरियों का निर्माण पूरा किया जा चुका है।

इन डबरियों के माध्यम से ग्रामीण परिवार मत्स्य पालन, बागवानी, सब्जी उत्पादन और अन्य आयवर्धक गतिविधियों से अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं।

वहीं ‘नवा तरिया-आय के जरिया’ पहल के तहत 624 सामुदायिक तालाब विकसित किए जा रहे

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