डॉ. वर्णिका शर्मा की मॉनिटरिंग और SJPU की त्वरित कार्रवाई रंग लाई, अंतरराज्यीय सीमा से बरामद हुई बालिका

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा की त्वरित पहल और लगातार मॉनिटरिंग के चलते बिलासपुर जिले के सिरगिट्टी थाना क्षेत्र से लापता 12 वर्षीय बालिका को सकुशल बरामद कर परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया है। इस कार्रवाई में विशेष किशोर पुलिस इकाई (SJPU) और बिलासपुर पुलिस की अहम भूमिका रही।

जानकारी के अनुसार, 3 जुलाई को बालिका की मां ने आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा से दूरभाष पर संपर्क कर बताया था कि उनकी 12 वर्षीय बेटी 27 जून से लापता है। उन्होंने आशंका जताई थी कि बच्ची किसी असुरक्षित स्थिति में हो सकती है। मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉ. शर्मा ने तत्काल SJPU की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रश्मिता कौर से चर्चा कर जांच में तेजी लाने के निर्देश दिए।
इसके बाद 5 जुलाई को डॉ. वर्णिका शर्मा स्वयं बिलासपुर पहुंचीं और सिरगिट्टी थाना में बालिका के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें भरोसा दिलाया। उन्होंने पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक और थाना प्रभारी के साथ समीक्षा बैठक कर जांच की प्रगति और आगे की रणनीति पर विस्तृत चर्चा की।
आयोग की लगातार मॉनिटरिंग के बाद पुलिस ने विशेष टीम गठित कर तकनीकी और मैदानी स्तर पर जांच तेज की। लगातार प्रयासों के परिणामस्वरूप 9 जुलाई को बालिका को अंतरराज्यीय सीमा से सकुशल बरामद कर लिया गया। महिला पुलिस अधिकारियों की उपस्थिति में उसका बयान दर्ज किया गया, जिसमें उसने बताया कि उसके साथ किसी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हुई। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद बालिका को सुरक्षित उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।
डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि प्रत्येक बच्चे की सुरक्षा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि आयोग बालिका के पुनर्वास, मनोसामाजिक परामर्श (काउंसलिंग), शिक्षा की निरंतरता और बाल संरक्षण से जुड़े सभी पहलुओं पर संबंधित विभागों के साथ समन्वय बनाकर आगे भी निगरानी करेगा।
आयोग ने बिलासपुर पुलिस और SJPU की त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए अभिभावकों से अपील की है कि यदि बच्चों के व्यवहार में अचानक बदलाव, घर से बिना बताए निकलना, अत्यधिक चिड़चिड़ापन या ध्यान की समस्या जैसे संकेत दिखाई दें तो उन्हें नजरअंदाज न करें। ऐसे मामलों में बच्चों से संवाद बनाए रखें और आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।
