CG News: बस्तर में 20,700 वर्गफीट की वनोपज रंगोली ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड, राष्ट्रपति मुर्मु ने किया अवलोकन
जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में प्राकृतिक संपदा और जनजातीय संस्कृति की अनूठी झलक देखने को मिली। बस्तर दशहरा के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के जगदलपुर आगमन पर वन विभाग ने लालबाग मैदान में वनोपज और अनाज से विशाल रंगोली तैयार कराई। करीब 20,700 वर्गफीट क्षेत्र में बनाई गई इस कलाकृति को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की ओर से प्रमाणित किया गया।
शुक्रवार सुबह लालबाग मैदान का एक बड़ा हिस्सा रंग-बिरंगी आकृतियों से सजा नजर आया। इस विशेष रंगोली में 15 से अधिक प्रकार की वनोपज और अनाज का उपयोग किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और अन्य अतिथियों ने इस अनूठी कलाकृति का अवलोकन किया।
वनोपज और अनाज से उकेरी गई बस्तर की पहचान
इस विशाल रंगोली की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसे तैयार करने में पारंपरिक रंगों के बजाय वनवासियों द्वारा एकत्र की जाने वाली वनोपज और अनाज का इस्तेमाल किया गया। कलाकृति के माध्यम से बस्तर के जंगलों, वनवासी जीवन, जनजातीय संस्कृति, प्राकृतिक संपदा और राष्ट्रपति के सम्मानित स्वरूप को प्रदर्शित किया गया।
वन विभाग की इस पहल ने स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों को कलात्मक अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया। रंगोली के जरिए बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और क्षेत्र की विकास यात्रा को भी सामने रखा गया।
राष्ट्रपति के बस्तर दौरे पर विशेष प्रस्तुति
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 23 अक्टूबर को दो दिवसीय छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान जगदलपुर पहुंचीं। बस्तर दशहरा के अवसर पर देश के प्रथम नागरिक का माई दंतेश्वरी की धरती पर आगमन क्षेत्र के लिए विशेष महत्व रखता है।
जगदलपुर पहुंचने के बाद राष्ट्रपति ने मां दंतेश्वरी के दर्शन किए और मुरिया दरबार में शामिल हुईं। इसके बाद उन्होंने लालबाग मैदान में आयोजित सभा को संबोधित किया। उनके आगमन को लेकर बस्तर में उत्साह का माहौल रहा।
इसी अवसर पर वन विभाग ने विशाल रंगोली के माध्यम से बदलते बस्तर की तस्वीर प्रस्तुत की। इसमें क्षेत्र की जनजातीय परंपराओं, प्राकृतिक संपदा और विकास की आकांक्षाओं को एक साथ दर्शाया गया।
जनजातीय आजीविका और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बनी रंगोली
बस्तर में वनोपज केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि जनजातीय और वनवासी समुदायों की आजीविका, आर्थिक आत्मनिर्भरता तथा सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। स्थानीय समुदायों द्वारा एकत्र की जाने वाली वनोपज का रंगोली में उपयोग पारंपरिक ज्ञान और संसाधनों के महत्व को रेखांकित करता है।
इस प्रस्तुति के माध्यम से वनोपज आधारित आजीविका को बढ़ावा देने, पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण और स्थानीय संसाधनों के सतत उपयोग की संभावनाओं को भी सामने रखा गया।
बस्तर दशहरा की परंपरा में जुड़ी अनूठी कलात्मक प्रस्तुति
बस्तर दशहरा अपनी विशिष्ट जनजातीय आस्थाओं, परंपराओं और सामुदायिक सहभागिता के लिए प्रसिद्ध है। ऐसे सांस्कृतिक अवसर पर प्राकृतिक संसाधनों से बनाई गई यह विशाल रंगोली बस्तर की परंपराओं और विकास की आकांक्षाओं के बीच समन्वय का संदेश देती है।
कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप, संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, सांसद महेश कश्यप, जगदलपुर विधायक किरण सिंह देव सहित अन्य जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे
