छत्तीसगढ़ की सुनीता यादव को राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने किया सम्मानित
सारंगढ़-बिलाईगढ़ की शिक्षिका ने ग्रामीण बच्चों की शिक्षा में नवाचार, तकनीक और संवेदनशीलता का रचा अनूठा मॉडल
रायपुर/सारंगढ़-बिलाईगढ़, 5 सितंबर 2026। शिक्षक दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का ऐतिहासिक क्षण सामने आया। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला विकासखंड स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय खिचरी की शिक्षिका श्रीमती सुनीता यादव को वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान से सम्मानित किया गया। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित गरिमामय समारोह में भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।
सुनीता यादव इस वर्ष छत्तीसगढ़ से राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान के लिए चयनित होने वाली एकमात्र शिक्षिका हैं। शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान, नवाचारपूर्ण शिक्षण पद्धतियों और विद्यार्थियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव के लिए उन्हें यह राष्ट्रीय सम्मान मिला है।
खेल-खेल में शिक्षा और नवाचार को बनाया शिक्षण का आधार
सीमित संसाधनों वाले ग्रामीण एवं वनांचल क्षेत्र के विद्यालय में सुनीता यादव ने शिक्षा को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने साहित्य, तकनीक, रचनात्मकता और अनुभव आधारित गतिविधियों को शिक्षण का हिस्सा बनाया।
कक्षा में अपेक्षाकृत पीछे रहने वाले बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने और उनमें सीखने की रुचि विकसित करने के लिए उन्होंने खेल-खेल में शिक्षा सहित विभिन्न नवाचारों को अपनाया।
लघु फिल्मों से लेकर स्मार्ट क्लास तक तकनीक का इस्तेमाल
कठिन विषयों को बच्चों के लिए सरल और रोचक बनाने के लिए सुनीता यादव स्वयं और विद्यार्थियों के अभिनय वाली लघु फिल्में तैयार करती हैं। इन फिल्मों का उपयोग वे शिक्षण प्रक्रिया में करती हैं।
इसके अलावा दीक्षा एप, स्टोरीवीवर, ऑडियो बुक, पॉडकास्ट, ब्लॉगिंग और स्मार्ट क्लास जैसे डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर उन्होंने ग्रामीण बच्चों के सीखने के अनुभव को अधिक प्रभावी बनाया है।
उनकी पहल में शिक्षा के साथ रोजगारमूलक जानकारी और डिजिटल साक्षरता को जोड़ने का प्रयास भी शामिल है।
आदिवासी बच्चों के लिए चलाया निशुल्क समर कैंप
सुनीता यादव का प्रयास केवल विद्यालय की कक्षा तक सीमित नहीं रहा। बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए वे अपने व्यय से विद्यार्थियों को नियमित दूध उपलब्ध कराती हैं और समुदाय को न्योता भोजन के लिए प्रेरित करती हैं।
शिक्षा से वंचित और कमजोर वर्ग के बच्चों तक पहुंच बनाने के लिए उन्होंने बिलासपुर जिले के शासकीय प्राथमिक विद्यालय तिलकडीह में आदिवासी बच्चों के लिए निशुल्क समर कैंप भी चलाया और अध्यापन किया।
सीड बॉल और राखी निर्माण से सामाजिक चेतना की पहल
सुनीता यादव ने विद्यार्थियों में शिक्षा के साथ सामाजिक एवं पर्यावरणीय जिम्मेदारी की भावना विकसित करने पर भी विशेष ध्यान दिया।
सीड बॉल तैयार करने, प्रकृति संरक्षण और देश की सुरक्षा में योगदान देने वाले सैनिकों के लिए राखी बनाने जैसी गतिविधियों के माध्यम से उन्होंने बच्चों में पर्यावरणीय और सामाजिक संवेदनशीलता विकसित करने का प्रयास किया।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर शोध पत्र तैयार करने वाली पहली महिला शिक्षिका
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के संदर्भ में सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के प्राथमिक विद्यालयों में आए बदलाव और उसके प्रभावों पर शोध पत्र तैयार करने वाली वे जिले की पहली महिला शिक्षिका हैं।
शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान को इससे पहले भी सम्मान मिल चुका है। वर्ष 2024 में उन्हें राज्य शिक्षक सम्मान प्रदान किया गया, जबकि वर्ष 2025 में साहित्य के क्षेत्र में पंडित मुकुटधर पांडे स्मृति अलंकरण से सम्मानित किया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी हुई मुलाकात
राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान समारोह से एक दिन पहले प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान के लिए चयनित शिक्षकों को अपने आवास पर आमंत्रित कर शुभकामनाएं दीं।
इस दौरान सुनीता यादव ने प्रधानमंत्री को अपने शिक्षण कार्य, नवाचारों और ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। प्रधानमंत्री ने शिक्षा में नवाचार, तकनीक और रचनात्मक माध्यमों के उपयोग की सराहना की।
ग्रामीण विद्यालय में लघु फिल्मों, ऑडियो बुक, पॉडकास्ट और स्मार्ट क्लास के माध्यम से शिक्षा देने के उनके प्रयासों ने विद्यालय को नवाचार आधारित शिक्षा के उदाहरण के रूप में स्थापित किया है।
सारंगढ़-बिलाईगढ़ के लिए गौरव का क्षण
सुनीता यादव को राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान मिलने पर जिले के प्रभारी मंत्री टंक राम वर्मा, कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू और पुलिस अधीक्षक सुनील शर्मा ने उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण और वनांचल क्षेत्र में रहकर बच्चों की शिक्षा को नवाचार, तकनीक और संवेदनशीलता से जोड़ने वाली शिक्षिका का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित होना पूरे सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले और छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है।
मेहनत और संवेदना से राष्ट्रीय पहचान तक का सफर
सांकरा, जिला महासमुंद में शिक्षक परिवार में जन्मीं सुनीता यादव छात्र जीवन से ही मेधावी रही हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा सांकरा में हुई। उन्होंने कला महाविद्यालय पिथौरा से स्नातक और पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की।
इसके बाद पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय बिलासपुर से बी.एड. की उपाधि प्राप्त कर उन्होंने शिक्षण को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में चुना।
आज राष्ट्रपति के हाथों मिला राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान उनकी इसी निरंतर यात्रा की राष्ट्रीय पहचान है—एक ऐसी यात्रा, जिसमें उन्होंने छोटे से ग्रामीण विद्यालय की कक्षा को साहित्य, नवाचार, तकनीक और संवेदनशीलता से जोड़कर बच्चों के लिए सीखने का जीवंत मंच बना दिया।
