बालिकाओं की सेहत से खिलवाड़ नहीं, आयोग सख्त; कोरबा के छात्रावास और बाल संप्रेक्षण गृह का निरीक्षण

कोरबा। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने रविवार को कोरबा के अनुसूचित जाति कन्या छात्रावास, सिविल लाइन थाना और बाल संप्रेक्षण गृह का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने बालिकाओं की स्वास्थ्य एवं स्वच्छता सुविधाओं को लेकर नाराजगी जताई और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक व्यवस्थाएं तत्काल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

छात्रावास में पर्याप्त शौचालय नहीं, सैनेटरी पैड भी उपलब्ध नहीं

अनुसूचित जाति कन्या छात्रावास के निरीक्षण के दौरान डॉ. शर्मा ने पाया कि छात्राओं की संख्या के अनुपात में पर्याप्त शौचालय उपलब्ध नहीं हैं। इसके अलावा बालिकाओं के लिए सैनेटरी पैड की व्यवस्था भी नहीं होने पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त की।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि बढ़ती उम्र की बालिकाओं के स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। छात्रावास में आवश्यक मूलभूत सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।

सिविल लाइन थाने में संवेदना कक्ष का किया अवलोकन

आयोग अध्यक्ष ने सिविल लाइन थाना का भी निरीक्षण किया। उन्होंने थाने में बाल कल्याण अधिकारी की व्यवस्था के संबंध में जानकारी ली और संवेदना कक्ष का अवलोकन किया।

डॉ. शर्मा ने संवेदना कक्ष को बच्चों के लिए अधिक बाल सुलभ, सुरक्षित और संवेदनशील बनाने पर जोर दिया, ताकि किसी भी बच्चे को पुलिस प्रक्रिया के दौरान असहजता का सामना न करना पड़े।

बाल संप्रेक्षण गृह में बच्चों से किया आत्मीय संवाद

बाल संप्रेक्षण गृह के निरीक्षण के दौरान डॉ. वर्णिका शर्मा ने वहां रह रहे बच्चों से आत्मीयता के साथ बातचीत की और उनकी समस्याओं एवं सुविधाओं के बारे में जानकारी ली।

उन्होंने पाया कि पिछले निरीक्षण की तुलना में संस्था की व्यवस्थाओं में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। सुरक्षा व्यवस्था के लिए गार्ड और साफ-सफाई के लिए सफाई कर्मी की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।

बालिकाओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर आयोग का सख्त रुख

डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि बालिकाओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य और मूलभूत सुविधाओं से जुड़े मामलों में आयोग का रुख सख्त रहेगा। बच्चों को बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना सभी संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि वहीं बाल संप्रेक्षण गृह में रह रहे बच्चों के सुधार, पुनर्वास और सकारात्मक भविष्य के लिए संवेदनशील एवं सकारात्मक वातावरण बनाए रखना आयोग की प्राथमिकताओं में शामिल है।

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