सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: NEET प्रदर्शन हिंसा की होगी स्वतंत्र जांच, छात्रों पर फिलहाल नहीं होगी कार्रवाई
नई दिल्ली। NEET पेपर लीक को लेकर देशभर में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के संकेत दिए हैं। अदालत ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए हिंसा और पुलिस पर हुए हमलों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और किसी निर्दोष के साथ अन्याय न हो।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच जारी रहेगी, लेकिन प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ फिलहाल कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। हालांकि, जिन लोगों का आपराधिक रिकॉर्ड है या हिंसा में संलिप्तता के ठोस प्रमाण मिलते हैं, उन्हें इस राहत का लाभ नहीं मिलेगा।
छात्रों को राहत, अपराधियों पर होगी कार्रवाई
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बाग्ची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि पुलिस दर्ज एफआईआर की जांच जारी रख सकती है, लेकिन केवल प्रदर्शन में शामिल होने के आधार पर छात्रों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी।
अदालत ने यह भी आदेश दिया कि 18 वर्ष से कम आयु के ऐसे छात्रों, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और जिन्हें हिरासत में लिया गया है, उन्हें साधारण बॉन्ड पर तत्काल रिहा किया जाए।
पुलिस पर हमले की भी होगी जांच
सुनवाई के दौरान पुलिसकर्मियों के परिजनों की ओर से भी याचिका दायर की गई, जिसमें ड्यूटी के दौरान पुलिस पर हुए हमलों की जांच की मांग की गई।
सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि हिंसा के दौरान 280 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए। उन्होंने कहा कि अधिकांश छात्र शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन कुछ आपराधिक तत्व भीड़ में घुसकर हिंसा और पत्थरबाजी में शामिल हुए।
कई राज्यों को जारी हुआ नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली, महाराष्ट्र, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, असम, पश्चिम बंगाल और केरल सहित उन राज्यों के मुख्य सचिवों को नोटिस जारी किया है, जहां प्रदर्शन और हिंसा की घटनाएं सामने आईं।
अदालत ने सभी संबंधित राज्यों को अगली सुनवाई में अपना पक्ष हलफनामे और आवश्यक दस्तावेजों के साथ प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
सबूत सुरक्षित रखने के आदेश
कोर्ट ने जांच की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा कि—
- सभी CCTV फुटेज सुरक्षित रखे जाएं।
- ड्रोन फुटेज, बॉडी कैमरा रिकॉर्डिंग, वीडियोग्राफी, वायरलेस कम्युनिकेशन रिकॉर्ड और PCR लॉग संरक्षित किए जाएं।
- प्रदर्शनकारियों, विशेषकर छात्रों का व्यक्तिगत डेटा सार्वजनिक नहीं किया जाए।
- पुलिस और राज्य सरकारें छात्रों की पहचान या निजी जानकारी सार्वजनिक करने से बचें।
3 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को निर्धारित की है। तब तक केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और संबंधित राज्य अपना विस्तृत जवाब अदालत में दाखिल करेंगे।
