हिंदू नववर्ष और चैत्र नवरात्रि की शुरुआत, मंदिरों में उमड़ा आस्था का सैलाब
उज्जैन। हिंदू नववर्ष के अवसर पर मां क्षिप्रा के पावन घाट पर श्रद्धा और आस्था का विशेष संगम देखने को मिला। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से विक्रम संवत 2083 का शुभारंभ हुआ। श्रद्धालुओं ने उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर नवसंवत्सर का स्वागत किया और सुख-समृद्धि की कामना की।
सनातन परंपरा के तहत आयोजित कार्यक्रम में मातृशक्ति ने शंखध्वनि के बीच गुड़ी सजाई और पुष्प, चंदन व इत्र के साथ मां क्षिप्रा के जल से नववर्ष का अभिनंदन किया। घाट क्षेत्र में पूरे दिन भक्तिमय माहौल बना रहा। विद्वानों के अनुसार विक्रम संवत भारतीय संस्कृति की प्राचीन परंपरा का प्रतीक है, जिसका आरंभ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से होता है।
नरसिंहपुर में चैत्र नवरात्रि के पहले दिन मां त्रिपुर सुंदरी का भव्य फूलों से श्रृंगार किया गया। झोंतेश्वर स्थित मंदिर में आरती के दौरान भक्तों की भीड़ उमड़ी और पूरे परिसर में भक्ति का वातावरण रहा। मान्यता है कि मां त्रिपुर सुंदरी की आराधना से भोग और मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है।
शहडोल जिले के अंतरा गांव स्थित कंकाली माता मंदिर में भी श्रद्धालुओं की आस्था देखने को मिली। कलचुरी कालीन दुर्लभ प्रतिमा के दर्शन के लिए भक्त पहुंचे। यहां मन्नत के रूप में श्रीफल और लाल कपड़े बांधने की परंपरा विशेष आकर्षण का केंद्र रही।
सीहोर जिले के विश्राम घाट स्थित मरीह माता मंदिर में नौ दिवसीय यज्ञ और विशेष पूजा अनुष्ठान शुरू हुए। नवरात्रि के दौरान यहां हर वर्ष भंडारे का आयोजन होता है। श्रद्धालुओं ने कन्या पूजन कर चुनरी अर्पित की और देवी का आशीर्वाद लिया।
धार में नववर्ष के अवसर पर किले की प्राचीर से सूर्यदेव को अर्घ्य देकर कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान लोगों ने शंख-घंटों की ध्वनि के बीच नववर्ष का स्वागत किया और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए तुलसी के पौधे वितरित किए गए।
शाजापुर के मां राजराजेश्वरी मंदिर में भी सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ रही। कलेक्टर ऋजू बाफना, पुलिस अधीक्षक यशपाल सिंह राजपूत और विधायक अरुण भीमावद की उपस्थिति में घट स्थापना के साथ पर्व की शुरुआत हुई। यहां 15 दिवसीय मेले का आयोजन भी शुरू हो गया है।
बुधनी के सलकनपुर स्थित मां विजयासन देवी मंदिर में भी विधि-विधान से घट और ज्योति स्थापना के साथ चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ हुआ। यह धाम हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना रहता है।
