महाशिवरात्रि 2026: देशभर में कल मनेगा शिव-पार्वती विवाह का पर्व, जानें शुभ मुहूर्त और राजयोग
देशभर में कल फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी के अवसर पर महाशिवरात्रि का त्योहार पूरी आस्था और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी तिथि पर भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इस विशेष दिन पर श्रद्धालु व्रत रखकर शिवालयों में महादेव का जलाभिषेक और विधि-विधान से पूजन करेंगे।
जलाभिषेक और चार प्रहर की पूजा का समय
महाशिवरात्रि पर जलाभिषेक के लिए सुबह 08:24 से दोपहर 12:35 बजे तक तीन प्रमुख मुहूर्त रहेंगे, जबकि चौथा मुहूर्त सुबह 06:11 से 07:47 बजे तक रहेगा। चार प्रहर की विशेष पूजा 15 फरवरी की शाम 06:11 बजे से शुरू होकर 16 फरवरी की सुबह 06:59 बजे तक चलेगी। पंचांग के अनुसार चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी को शाम 05:04 बजे से प्रारंभ होगी, इसलिए महाशिवरात्रि का व्रत रविवार को ही रखा जाएगा। व्रत का पारण 16 फरवरी को सुबह 06:59 से दोपहर 03:24 बजे के बीच किया जा सकेगा।
दुर्लभ राजयोग और शुभ संयोग
इस वर्ष महाशिवरात्रि पर ग्रहों की स्थिति अत्यंत विशेष रहने वाली है। कुंभ राशि में सूर्य, बुध, शुक्र और शनि की उपस्थिति से बुधादित्य, लक्ष्मी नारायण, शुक्रादित्य और शश महापुरुष जैसे चार प्रमुख राजयोग बन रहे हैं। इसके साथ ही शिव योग, सर्वार्थ सिद्धि, सौभाग्य और प्रीति सहित कुल 10 शुभ योगों का निर्माण हो रहा है, जो इस दिन के महत्व को कई गुना बढ़ा रहे हैं।
पूजन विधि और सामग्री
श्रद्धालु सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प लेकर पूजा स्थल पर कलश स्थापना करें। पूजन में बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी पत्र, आक के फूल, चंदन, अक्षत और फल-मिठाई का विशेष महत्व है। भगवान शिव के सम्मुख घी का दीपक जलाकर शिवलिंग का गंगाजल और दूध से अभिषेक करना फलदायी माना जाता है। भक्त मिट्टी के पार्थिव शिवलिंग बनाकर भी विशेष आराधना कर सकते हैं।
