ट्रेड डील से भारत की बड़ी जीत: कपड़ों और रत्नों के निर्यात पर भारी छूट, खुलेंगे रोजगार के नए द्वार
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका ने एक महत्वपूर्ण अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप दे दिया है। हालांकि अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर होना अभी शेष है, लेकिन इस अंतरिम डील के तहत अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लगने वाले 50 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर अब अधिकतम 18 प्रतिशत कर दिया है। इस फैसले से अमेरिकी बाजार में भारतीय वस्तुएं चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों के मुकाबले सस्ती और अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाएंगी।
इस व्यापार समझौते का सीधा लाभ भारतीय निर्यातकों, विशेषकर लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSME) को मिलेगा। सरकार का मानना है कि इससे देश में महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। समझौते के तहत विभिन्न क्षेत्रों को मिलने वाले लाभ इस प्रकार हैं:
जेम्स एंड ज्वेलरी: पॉलिश हीरे, रंगीन रत्न और सोने-चांदी के आभूषणों के लिए 61 अरब डॉलर के अमेरिकी बाजार के द्वार खुल गए हैं। हीरे और प्लैटिनम जैसे उत्पादों पर शून्य प्रतिशत टैरिफ की छूट मिलेगी। चीन और थाईलैंड पर लगे अतिरिक्त टैरिफ के कारण भारत को इस क्षेत्र में बड़ी बढ़त मिलने की उम्मीद है।
कपड़ा और टेक्सटाइल: रेशम, रेडीमेड गारमेंट्स और कालीन के निर्यात पर टैरिफ में भारी कटौती की गई है। रेशम पर टैरिफ घटकर शून्य होने से भारत की पहुंच 113 अरब डॉलर के बड़े बाजार तक हो जाएगी। वियतनाम और बांग्लादेश के मुकाबले कम टैरिफ होने से भारतीय वस्त्रों की मांग बढ़ेगी।
कृषि और खाद्य उत्पाद: इस समझौते के तहत भारत भी अमेरिका से आने वाले सूखे अनाज, मेवे, ताजे फल और सोयाबीन तेल जैसे उत्पादों पर आयात शुल्क में कमी या समाप्ति करेगा।
घर की सजावट और अन्य क्षेत्र: फर्नीचर, रजाई और लैंप जैसे उत्पादों पर टैरिफ 50 से घटकर 18 प्रतिशत रह गया है। इससे भारत को 52 अरब डॉलर के बाजार तक पहुंच मिलेगी। इसके अलावा मशीनरी और खिलौना उद्योग में भी भारतीय निर्यात को बड़ी सफलता मिलने की संभावना है।
मशीनरी क्षेत्र में टैरिफ कम होने से विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा, जिससे 477 अरब डॉलर के वैश्विक बाजार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ने का अनुमान है।
