रघुनाथनगर में प्रभारी रेंजर पर रिश्वत लेने का आरोप, वीडियो वायरल होने से मचा हड़कंप

बलरामपुर। रघुनाथनगर वन परिक्षेत्र में पदस्थ प्रभारी रेंजर शिवनाथ ठाकुर एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में वे कथित रूप से एक व्यक्ति से रिश्वत लेते और 500-500 रुपये के नोट गिनते नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद जिलेभर में हड़कंप मच गया है और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

जानकारी के अनुसार यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी सरगुजा रेंज के आईजी और मुख्य वन संरक्षक को लिखित शिकायत दी जा चुकी है। शिकायत में सड़क किनारे ठेला लगाने वाले गरीब व्यवसायियों से हर महीने 5000 रुपये की अवैध वसूली का आरोप लगाया गया था। शिकायत उच्च स्तर तक पहुंची, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

रघुनाथनगर वन परिक्षेत्र के ग्राम पंडरी में 7 जनवरी को वन विभाग ने 43 लोगों को अतिक्रमण हटाने का नोटिस जारी किया था। नोटिस में तीन दिन के भीतर दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश थे, लेकिन 15 दिन से अधिक समय बीतने के बाद भी न तो कोई कार्रवाई हुई और न ही स्थिति स्पष्ट हो सकी।

ग्रामीणों का आरोप है कि नोटिस के अगले दिन उनके खिलाफ थाने में फर्जी और निराधार एफआईआर दर्ज कराई गई। आरोप है कि वन विभाग के कर्मचारी पीयूष पटेल ने मारपीट और वर्दी फाड़ने की शिकायत की, जबकि ग्रामीणों का कहना है कि वे घटना के समय वर्दी में मौजूद ही नहीं थे।

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रभावशाली लोगों के संरक्षण में वर्षों से अतिक्रमण चलता आ रहा है और विभाग ने नोटिस जारी कर केवल औपचारिकता निभाई। साथ ही प्रभारी रेंजर पर रिश्वत लेने, ठेला व्यवसायियों को धमकाने, मारपीट करने और फर्जी मामलों में फंसाने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए जा रहे हैं।

ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि शिवनाथ ठाकुर ने पैसे लेकर वन भूमि पर कब्जा कराया है और यह सिलसिला उनके सिपाही रहते ही शुरू हो गया था। प्रभारी रेंजर बनने के बाद यह और बढ़ गया।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि विभागीय नियमों के बावजूद शिवनाथ ठाकुर 15 से 20 वर्षों तक एक ही रेंज में कैसे पदस्थ रहे। इतने लंबे समय तक एक ही क्षेत्र में बने रहना पारदर्श दिखाता है।

वायरल वीडियो और लगातार सामने आ रहे आरोपों के बाद आम लोगों और सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। अब देखना होगा कि वन विभाग और शासन इस पर क्या कार्रवाई करते हैं।

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