रायपुर: सेना दिवस पर 5 लाख विद्यार्थियों ने एक साथ गाया वंदे मातरम्, स्थापित किया नया राष्ट्रीय कीर्तिमान

रायपुर, 15 जनवरी 2026: सेना दिवस के अवसर पर रायपुर ने देशभक्ति का एक ऐतिहासिक और अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया। रायपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद बृजमोहन अग्रवाल के प्रेरक मार्गदर्शन और प्रभावी नेतृत्व में लगभग 5 लाख विद्यार्थियों ने एक साथ सामूहिक रूप से पूर्ण वंदे मातरम् का गायन कर देश में नया कीर्तिमान स्थापित किया।

रायपुर के नेताजी सुभाष स्टेडियम में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में रायपुर तथा बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के करीब 3000 स्कूलों, कॉलेजों और अन्य शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थी, एनएसएस, स्काउट्स एंड गाइड्स, एनसीसी कैडेट्स, जनप्रतिनिधि तथा स्थानीय नागरिक शामिल हुए। सांसद बृजमोहन अग्रवाल स्वयं उपस्थित रहे और विद्यार्थियों तथा कैडेट्स ने उनका जोरदार स्वागत किया।

कार्यक्रम की शुरुआत श्री राम संगीत महाविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा पूर्ण वंदे मातरम् के संगीतमय गायन से हुई। इसके बाद हजारों विद्यार्थियों और उपस्थित सभी लोगों ने एक स्वर में राष्ट्रगान गाया। यह दृश्य राष्ट्रप्रेम, एकता और अनुशासन का जीवंत प्रतीक बन गया। विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत रंगारंग देशभक्ति कार्यक्रमों ने पूरे वातावरण को राष्ट्रभक्ति की भावना से ओतप्रोत कर दिया।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य जन-जन के मन में भारत माता के प्रति आदर, सम्मान और गहरी देशभक्ति की भावना जागृत करना है। उन्होंने कहा कि मातृभूमि के प्रति समर्पण, कर्तव्यबोध तथा राष्ट्रभक्ति के संस्कार भावी पीढ़ी में विकसित हों, इसी संकल्प के साथ यह ऐतिहासिक आयोजन किया गया।

बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित वंदे मातरम् भारत का राष्ट्रीय गीत है, जिसका शाब्दिक अर्थ है “मैं अपनी मातृभूमि को नमन करता हूं”। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह गीत क्रांतिकारियों का उद्घोष बना और इसी नारे के साथ वीर शहीदों तथा स्वतंत्रता सेनानियों ने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष किया तथा देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।

सांसद ने आगे कहा कि वंदे मातरम् ने देशवासियों के भीतर एकता, साहस और बलिदान की भावना को प्रज्वलित किया। यह गीत आज भी हमें स्मरण कराता है कि देश केवल भूमि का टुकड़ा नहीं, बल्कि हमारी मां है। वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, अपितु मातृभूमि के प्रति समर्पण, सम्मान और संकल्प का उद्घोष है।

उन्होंने सभी शिक्षण संस्थानों से आह्वान किया कि सप्ताह में एक दिन सामूहिक वंदे मातरम् गायन की परंपरा शुरू की जाए ताकि आने वाली पीढ़ियों में राष्ट्रभक्ति की चेतना और अधिक सशक्त हो सके।

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