रायगढ़ के तमनार में कोयला खदान विरोधी प्रदर्शन उग्र, पुलिस-ग्रामीणों में झड़प पर सियासी बवाल
रायपुर। रायगढ़ जिले के तमनार में कोयला खदान आवंटन के विरोध में आंदोलनरत ग्रामीणों और पुलिस के बीच 27 दिसंबर को हुई हिंसक झड़प ने राजनीतिक रंग ले लिया है। सत्ताधारी भाजपा और विपक्षी कांग्रेस आमने-सामने हैं। डिप्टी सीएम अरुण साव ने घटना की जांच की बात कही है, जबकि भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह ने विकास के लिए राजस्व की जरूरत पर जोर दिया।
दीपक बैज ने जिला प्रशासन को ठहराया जिम्मेदार
तमनार का दौरा कर लौटे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने पूर्व मंत्री शिव डहरिया और संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह घटना भाजपा की गांव, गरीब, किसान और आदिवासी विरोधी नीति का नतीजा है। उन्होंने जांच दल गठित करने की घोषणा की। बैज ने आरोप लगाया कि 27 दिसंबर की घटना के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह जिम्मेदार है। आंदोलनकारियों को साजिशन कुचलने की रणनीति अपनाई गई और उन्हें उकसाया गया।
बैज के अनुसार, जिंदल पावर कंपनी को कोल माइंस आवंटित हुआ। जनसुनवाई 8 दिसंबर को थी, लेकिन ग्रामीण 5 दिसंबर से धरने पर थे। 14 गांवों के 10 हजार से अधिक लोगों ने मानव श्रृंखला बनाकर विरोध किया। प्रशासन ने चुपके से दूर टेबल लगाकर सुनवाई की और कंपनी कर्मचारियों से फर्जी हस्ताक्षर कराए। ग्रामीणों से बातचीत नहीं की गई। 27 दिसंबर को कोयला लदी गाड़ियां निकालने के दौरान पुलिस बल तैनात किया गया, जिससे ग्रामीण आक्रोशित हुए। 40 गिरफ्तारियां हुईं, महिलाओं को घसीटा गया और आंसू गैस का प्रयोग किया गया।
कांग्रेस ने जनसुनवाई को चोरी-छिपे और गलत बताते हुए निरस्त करने तथा ग्रामीणों की मांगों का समर्थन करने की अपील की है। यह मामला अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का केंद्र बन गया है।
