रायपुर: मनरेगा का नाम बदलने के केंद्र के फैसले के खिलाफ कांग्रेस का राज्यव्यापी प्रदर्शन
रायपुर, 22 दिसंबर 2025। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम बदलने के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ में राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन किया। रायपुर के आजाद चौक सहित सभी जिला मुख्यालयों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर केंद्र सरकार एवं भाजपा के खिलाफ नारे लगाए।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण गरीबों के लिए काम का कानूनी अधिकार है। नाम बदलकर इसे विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण (वीबी-ग्राम-जी) करने से योजना की मूल भावना कमजोर हो रही है। पार्टी का आरोप है कि यह बदलाव महात्मा गांधी के नाम को हटाने तथा रोजगार गारंटी को धीरे-धीरे समाप्त करने की दिशा में कदम है।
कांग्रेस ने कहा कि मनरेगा के तहत गांवों को अपनी जरूरत के अनुसार काम तय करने का अधिकार था तथा मजदूरों को निर्धारित समय पर पूरी मजदूरी मिलती थी। नए ढांचे से इन अधिकारों पर असर पड़ने की आशंका है। सरकार नए कानून में सालाना रोजगार के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 करने का दावा कर रही है, लेकिन छत्तीसगढ़ में ज्यादातर परिवारों को 100 दिन का काम भी नहीं मिल पा रहा, ऐसे में 125 दिन का वादा कैसे पूरा होगा।
नए प्रावधान में खेती के मौसम में सरकारी रोजगार कार्य नहीं कराए जाएंगे, जिसे सरकार किसानों के हित में बता रही है, लेकिन कांग्रेस का कहना है कि इससे ग्रामीण मजदूरों के कुल काम के दिन घट सकते हैं।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि नए फंडिंग फॉर्मूले से राज्यों पर खर्च का बोझ बढ़ेगा। अब छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों को योजना का 40 प्रतिशत खर्च खुद वहन करना होगा, जिससे क्रियान्वयन प्रभावित हो सकता है।
2023-24 के आंकड़ों के अनुसार राज्य में प्रति परिवार औसतन करीब 52 दिन का ही रोजगार मिल पाया। केवल 14 प्रतिशत परिवारों को पूरे 100 दिन का काम मिला। महिलाओं एवं आदिवासियों की भागीदारी अधिक होने के बावजूद उन्हें भी सीमित रोजगार मिला।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मनरेगा को कमजोर करने का कोई प्रयास बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि रोजगार गारंटी से छेड़छाड़ हुई, तो प्रदेश से संसद तक आंदोलन किया जाएगा।
