छोटे शहरों से बढ़ा क्रिप्टो निवेश, 75 प्रतिशत निवेशक टियर-2, 3 और 4 शहरों से
नई दिल्ली। देश में क्रिप्टोकरेंसी निवेश का दायरा तेजी से छोटे और मझोले शहरों तक फैल रहा है। कॉइनस्विच की इंडिया क्रिप्टो पोर्टफोलियो 2025 रिपोर्ट के अनुसार, भारत के 75 प्रतिशत क्रिप्टो निवेशक टियर-2, टियर-3 और टियर-4 शहरों से हैं। वर्ष 2025 में क्रिप्टो एडॉप्शन की सबसे अधिक वृद्धि इन्हीं शहरों से दर्ज की गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, क्रिप्टो एडॉप्शन में टियर-3 और टियर-4 शहरों की हिस्सेदारी 43.4 प्रतिशत रही, जबकि टियर-2 शहरों का योगदान 32.2 प्रतिशत है। टियर-1 शहरों की हिस्सेदारी अब 25 प्रतिशत रह गई है, जिससे स्पष्ट है कि निवेश का दायरा बड़े शहरों से बाहर तेजी से फैल रहा है।
राज्यवार आंकड़ों में उत्तर प्रदेश 13 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ पहले स्थान पर रहा। यहां निवेशकों ने स्मॉल कैप, मिड कैप और लार्ज कैप एसेट्स में संतुलित निवेश किया। महाराष्ट्र 12.1 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जहां निवेशकों ने ब्लूचिप और लार्ज कैप क्रिप्टो एसेट्स को प्राथमिकता दी।
क्रिप्टो निवेशकों में युवाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। 26 से 35 वर्ष आयु वर्ग के निवेशकों की हिस्सेदारी 45 प्रतिशत रही, जबकि 18 से 25 वर्ष आयु वर्ग की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत दर्ज की गई। इसके विपरीत, 35 वर्ष से अधिक आयु के निवेशकों की भागीदारी में गिरावट देखी गई है।
महिला निवेशकों की हिस्सेदारी देशभर में 12 प्रतिशत है, लेकिन आंध्र प्रदेश में यह आंकड़ा 59 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो पुरुष निवेशकों से 18 प्रतिशत अधिक है। जोखिम लेने के मामले में बिहार अग्रणी रहा, जहां 36.5 प्रतिशत निवेशक स्मॉल कैप क्रिप्टो एसेट्स में निवेश कर रहे हैं।
रिपोर्ट 2.5 करोड़ उपयोगकर्ताओं के डेटा पर आधारित है और इसके अनुसार भारत लगातार तीसरे वर्ष खुदरा क्रिप्टो एडॉप्शन में वैश्विक स्तर पर अग्रणी रहा है। आंकड़े बताते हैं कि छोटे शहरों के निवेशक अब क्रिप्टोकरेंसी को दीर्घकालिक निवेश के रूप में देख रहे हैं।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि भारत में क्रिप्टोकरेंसी को अभी कानूनी मान्यता प्राप्त नहीं है और इस पर लगभग 30 प्रतिशत कर लागू है। रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर टी रवि शंकर पहले ही संकेत दे चुके हैं कि क्रिप्टोकरेंसी पर पूर्ण प्रतिबंध के विकल्प पर चर्चा जारी है।
